आज की डिजिटल लाइफस्टाइल में सुबह की शुरुआत अक्सर मोबाइल स्क्रीन से होती है। अलार्म बंद करते ही नोटिफिकेशन, मैसेज और सोशल मीडिया चेक करने की आदत आम हो चुकी है। लेकिन नींद से जागते ही तेज रोशनी और ब्लू लाइट के संपर्क में आना आंखों के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इससे ड्राईनेस, जलन, सिरदर्द और डिजिटल आई स्ट्रेन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
नींद से उठने के तुरंत बाद आंखें रिलैक्स अवस्था में होती हैं। ऐसे में अचानक स्क्रीन देखने से उन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। बेहतर है कि जागने के बाद कम से कम 15–20 मिनट तक मोबाइल से दूरी रखें। इस दौरान पानी पीना, हल्की स्ट्रेचिंग करना या खिड़की खोलकर ताजी हवा लेना ज्यादा फायदेमंद है।
रातभर सोने के दौरान आंखों में नमी कम हो जाती है, इसलिए सुबह ठंडे पानी से आंखें धोना ताजगी देता है और ड्राईनेस कम करता है। साथ ही सुबह की हल्की प्राकृतिक धूप में कुछ मिनट बिताना आंखों की मांसपेशियों को रिलैक्स करता है और दिनभर के लिए बेहतर फोकस में मदद करता है।
अगर मोबाइल देखना जरूरी हो, तो 20-20-20 नियम अपनाएं—हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखें। इससे आंखों पर पड़ने वाला तनाव कम होता है। साथ ही ब्लू लाइट फिल्टर या नाइट मोड का इस्तेमाल करें और स्क्रीन ब्राइटनेस को जरूरत के अनुसार कम रखें।
लगातार स्क्रीन देखने की आदत से बच्चों और युवाओं में डिजिटल आई स्ट्रेन तेजी से बढ़ रहा है। छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर आंखों को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।