सोनम वांगचुक की रिहाई पर केंद्र सख्त: सुप्रीम कोर्ट में कहा- सेहत सामान्य, NSA के आधार कायम

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जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि स्वास्थ्य आधार पर उनकी रिहाई संभव नहीं है। सरकार का कहना है कि वांगचुक की सेहत पूरी तरह सामान्य है और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत उनकी हिरासत के आधार अब भी लागू हैं।

Supreme Court of India में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और पीबी वराले की बेंच को बताया कि वांगचुक की 24 बार मेडिकल जांच की गई है और वे किसी गंभीर स्वास्थ्य जोखिम में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि केवल हल्की पाचन संबंधी समस्या थी, जिसका उपचार किया जा रहा है। अदालत से उन्होंने स्पष्ट कहा कि स्वास्थ्य के आधार पर अपवाद नहीं बनाया जा सकता क्योंकि हिरासत आदेश अभी भी प्रभावी है।

सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने आरोप लगाया कि वांगचुक ने युवाओं को हिंसक प्रदर्शन के लिए उकसाया। हालांकि बेंच ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उपलब्ध बयान सीधे तौर पर हिंसा भड़काने का प्रमाण नहीं देते, बल्कि युवाओं के विचारों का उल्लेख करते हैं।

वांगचुक की पत्नी गितांजलि अंगमो ने हाबियस कॉर्पस याचिका दायर कर हिरासत को अवैध घोषित करने की मांग की है। वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को लेह में हुई हिंसा के दो दिन बाद हिरासत में लिया गया था, जिसमें चार लोगों की मौत हुई थी। सरकार का आरोप है कि उनके बयानों ने माहौल को प्रभावित किया, जबकि याचिकाकर्ता का कहना है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर हिंसा की निंदा की थी।

NSA के तहत किसी व्यक्ति को अधिकतम 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है, यदि उसके कार्यों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हानिकारक माना जाए। अब सुप्रीम कोर्ट में यह बहस केंद्र में है कि क्या हिरासत के आधार पर्याप्त हैं या नहीं।

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