सुरक्षित इंटरनेट दिवस पर दुर्ग कलेक्टोरेट में साइबर सुरक्षा और एआई के सुरक्षित उपयोग पर जागरूकता कार्यक्रम संपन्न

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दुर्ग, 11 फरवरी 2026/ सुरक्षित इंटरनेट दिवस के उपलक्ष्य में विगत दिवस चिप्स (CHiPS) जिला दुर्ग द्वारा कलेक्टोरेट के सभा कक्ष में एक महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी बड़ी संख्या में शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों के प्रति प्रशासनिक अमले को सचेत करना और इंटरनेट के सुरक्षित एवं जिम्मेदार उपयोग की संस्कृति को बढ़ावा देना था। कलेक्टर श्री सिंह ने इस अवसर पर कहा कि वर्तमान में बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य और समस्त सरकारी कार्य इंटरनेट पर आधारित हैं, इसलिए सुरक्षा के मानकों का पालन करना अब विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्य आवश्यकता बन गया है।
   कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने विस्तृत प्रजेंटेशन के माध्यम से बताया कि साइबर अपराधी किस तरह नई तकनीकों के जरिए लोगों को निशाना बना रहे हैं। अधिकारियों को सलाह दी गई कि वे किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, संदिग्ध ईमेल और संदेशों से सावधान रहें और केवल आधिकारिक बैंकिंग ऐप्स का ही उपयोग करें। वित्तीय लेनदेन की सुरक्षा पर जोर देते हुए बताया गया कि सार्वजनिक वाई-फाई का उपयोग करते समय बैंकिंग ट्रांजैक्शन से बचना चाहिए और अपने पासवर्ड व पिन को नियमित रूप से बदलते रहना चाहिए। इसके साथ ही, ओटीपी और सीवीवी जैसी गोपनीय जानकारी किसी से भी साझा न करने की सख्त हिदायत दी गई। यदि कोई साइबर ठगी का शिकार होता है, तो उन्हें तत्काल राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 या साइबर क्राइम की आधिकारिक वेबसाइट पर शिकायत दर्ज कराने हेतु प्रेरित किया गया।
  कार्यक्रम के एक विशेष सत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव और उससे जुड़ी चुनौतियों पर भी गंभीर चर्चा की गई। जहाँ एआई को सरकारी कामकाज में सहायक बताया गया, वहीं डीपफेक वीडियो, फर्जी ऑडियो और डेटा चोरी जैसे खतरों के प्रति भी आगाह किया गया। उपस्थित जनसमूह को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया कि किसी भी एआई प्लेटफॉर्म का उपयोग करते समय आधार नंबर, बैंक विवरण, पासवर्ड और महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों जैसी संवेदनशील जानकारी साझा न करें। सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल और भ्रामक खबरों से बचने की सलाह देते हुए कार्यक्रम का समापन किया गया, ताकि एक सुरक्षित और सशक्त डिजिटल समाज का निर्माण किया जा सके।

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