छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में एक स्कूल का वार्षिक उत्सव उस समय विवादों में घिर गया जब बच्चों को तीन महीने पहले एक्सपायर हो चुके चिप्स के पैकेट बांटने का मामला सामने आया। यह घटना ग्राम पउवारा स्थित उतई थाना क्षेत्र के रॉयल एकेडमी स्कूल की बताई जा रही है। खास बात यह है कि यह जिला प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री Gajendra Yadav का गृह जिला भी है, जिसके चलते मामला और संवेदनशील हो गया है।
बताया गया कि 10 फरवरी को आयोजित वार्षिक उत्सव के दौरान स्कूल परिसर में लगे स्टॉल से बच्चों को चिप्स और कुरकुरे के पैकेट वितरित किए गए। बाद में जब अभिभावकों को पैकेट की एक्सपायरी डेट का पता चला तो उन्होंने स्कूल पहुंचकर जमकर विरोध जताया। परिजनों का सवाल था कि अगर बच्चे इन उत्पादों को खाकर बीमार पड़ जाते तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता?
अभिभावकों की शिकायत के बाद जब स्कूल स्टाफ ने पैकेट की जांच की तो पाया गया कि कई उत्पाद तीन महीने पहले ही एक्सपायर हो चुके थे। इससे नाराज परिजनों ने स्टॉल को घेर लिया और स्कूल प्रबंधन से तीखे सवाल किए। माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि पुलिस को मौके पर बुलाना पड़ा।
उतई थाना प्रभारी के अनुसार पुलिस जांच में भी एक्सपायरी उत्पाद मिलने की पुष्टि हुई। बच्चों द्वारा इनका सेवन किए जाने की बात भी सामने आई। शिकायत के आधार पर स्कूल संचालक मोहम्मद अकरण और कर्मचारी गुलशरीफ के खिलाफ लापरवाही और मानव जीवन को खतरे में डालने से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया। साथ ही धारा 151 के तहत भी कार्रवाई की गई।
विवाद यहीं नहीं थमा। जिस दुकानदार से यह सामान खरीदा गया था, उसने दावा किया कि उत्पाद सुरक्षित हैं और पैकेट पर तारीख छपाई की त्रुटि हो सकती है। इस दावे ने अभिभावकों का गुस्सा और बढ़ा दिया। सवाल उठे कि स्कूल प्रबंधन ने बिना उचित जांच के स्टॉल की अनुमति कैसे दी और बच्चों के स्वास्थ्य से समझौता क्यों किया गया?
शिकायतकर्ता अभिभावक कमलेश कुमार नेताम ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रशासन ने शुरुआत में गोलमोल जवाब दिए, जिसके बाद अभिभावकों को थाने जाकर औपचारिक शिकायत दर्ज करानी पड़ी।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने भी मामले की जांच की बात कही है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार पुलिस से विस्तृत जानकारी लेकर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना सिर्फ एक स्कूल की लापरवाही नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। वार्षिक उत्सव जैसे कार्यक्रम, जहां खुशी और उत्साह होना चाहिए था, वहां स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर चिंता ने माहौल बिगाड़ दिया। अब सबकी नजर जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी है।