भारतीय शेयर बाजार में आईटी सेक्टर इन दिनों जबरदस्त दबाव में है। लगातार तीसरे कारोबारी दिन बिकवाली का ऐसा तूफान आया कि आईटी इंडेक्स करीब 5 प्रतिशत तक फिसल गया। इससे एक दिन पहले भी 5.5 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज की गई थी। साल 2026 की शुरुआत से अब तक इंडेक्स लगभग 17 प्रतिशत टूट चुका है और यह प्रदर्शन मार्च 2020 के बाद का सबसे कमजोर साप्ताहिक ट्रेंड माना जा रहा है।
इस गिरावट ने बाजार में तेजी की धारणा को बड़ा झटका दिया है। निवेशकों के बीच घबराहट साफ दिखाई दे रही है, खासकर उन लोगों में जिन्होंने आईटी शेयरों को सुरक्षित दांव मानकर निवेश किया था।
बाजार के दिग्गज आईटी शेयर भी इस दबाव से नहीं बच पाए। Tata Consultancy Services करीब 4.88 प्रतिशत टूट गया, Infosys में 6.28 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज हुई, जबकि HCLTech लगभग 4.66 प्रतिशत लुढ़क गया। इन बड़ी कंपनियों में गिरावट ने पूरे सेक्टर की धारणा को कमजोर कर दिया।
इस बिकवाली की सबसे बड़ी वजह एआई ऑटोमेशन को लेकर बढ़ती चिंता बताई जा रही है। निवेशकों को आशंका है कि तेज़ी से विकसित हो रही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक भारतीय आईटी कंपनियों के पारंपरिक लेबर-इंटेंसिव मॉडल को प्रभावित कर सकती है। कम मानव संसाधन और ज्यादा ऑटोमेशन का ट्रेंड आने वाले समय में मार्जिन और प्रोजेक्ट स्ट्रक्चर बदल सकता है।
वैश्विक संकेत भी इस गिरावट को और गहरा कर रहे हैं। टेक्नोलॉजी शेयरों से भरा अमेरिकी Nasdaq Composite 2 प्रतिशत से अधिक गिर गया, जिससे भारतीय आईटी शेयरों पर अतिरिक्त दबाव बना। अमेरिका से आए मजबूत रोजगार आंकड़ों ने यह संकेत दिया कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो सकती है। आमतौर पर दरों में कटौती से आईटी कंपनियों को क्लाइंट खर्च बढ़ने की उम्मीद रहती है, लेकिन फिलहाल यह उम्मीद कमजोर पड़ती दिख रही है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि तेज गिरावट ने निवेशकों के आत्मविश्वास को चोट पहुंचाई है। गिरावट की शुरुआत 4 फरवरी के आसपास मानी जा रही है, जब एंथ्रोपिक ने अपना नया एआई टूल पेश किया। इस कदम के बाद सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई। एशियाई बाजारों में भी टेक सेक्टर में मुनाफे के दबाव की आशंका के चलते कमजोरी देखने को मिली।
फिलहाल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। अल्पकालिक निवेशकों के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन लंबी अवधि के नजरिए से देखने वाले निवेशकों के लिए यह गिरावट अवसर भी पैदा कर सकती है। हालांकि, किसी भी निवेश से पहले जोखिम, वैश्विक संकेतों और सेक्टर की बुनियादी स्थिति का आकलन करना जरूरी है।
आईटी सेक्टर की यह गिरावट सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं, बल्कि बदलती टेक्नोलॉजी और वैश्विक आर्थिक माहौल का संकेत भी है। आने वाले हफ्तों में बाजार का रुख काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय संकेतों और एआई को लेकर स्पष्टता पर निर्भर करेगा।