हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में तेज झटका देखने को मिला। सुबह के सत्र में ही BSE Sensex 800 से ज्यादा अंक टूटकर 82,791 के आसपास आ गया, जबकि Nifty 50 25,550 के अहम स्तर के नीचे फिसल गया। बाजार की यह गिरावट केवल एक-दो सेक्टर तक सीमित नहीं रही, बल्कि लगभग सभी प्रमुख सेक्टर लाल निशान में कारोबार करते दिखे।
सबसे ज्यादा दबाव आईटी शेयरों में दिखाई दिया। लगातार तीसरे दिन भारी बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। एआई ऑटोमेशन के तेजी से बढ़ते दायरे ने पारंपरिक आईटी कंपनियों के बिजनेस मॉडल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी आशंका के बीच Infosys, TCS, HCL Technologies और Tech Mahindra जैसे दिग्गज शेयरों में जोरदार गिरावट दर्ज की गई। आईटी इंडेक्स इस सप्ताह दो अंकों की गिरावट झेल चुका है और साल 2026 में अब तक भारी नुकसान दर्ज कर चुका है।
मेटल सेक्टर भी दबाव से अछूता नहीं रहा। इंडेक्स करीब 3% तक फिसल गया। Hindalco के शेयरों में 6% तक की गिरावट देखी गई, क्योंकि कंपनी के तिमाही मुनाफे में बड़ी कमी ने निवेशकों को निराश किया। स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में भी तेज बिकवाली हुई, जिससे व्यापक बाजार की कमजोरी साफ नजर आई।
गिरावट की एक बड़ी वजह वैश्विक संकेत भी रहे। एशियाई बाजारों—Hang Seng Index, Nikkei 225 और Shanghai Composite—में कमजोरी देखी गई। अमेरिकी बाजार में टेक शेयरों की बिकवाली के चलते Nasdaq Composite 2% से ज्यादा गिर गया। मजबूत अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के बाद Federal Reserve की ओर से जल्द ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमज़ोर पड़ी है, जिससे वैश्विक निवेशकों का रुख सतर्क हो गया है।
बाजार की अस्थिरता भी बढ़ी है। इंडिया विक्स में उछाल यह संकेत दे रहा है कि निवेशकों के बीच डर और अनिश्चितता बढ़ रही है। रुपये पर भी दबाव बना रहा और यह शुरुआती कारोबार में डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ। मजबूत डॉलर और घरेलू बाजार की गिरावट ने मुद्रा को झटका दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर सकता है। ऐसे समय में भावनात्मक फैसलों से बचते हुए दीर्घकालिक रणनीति पर टिके रहना बेहतर माना जा रहा है। आईटी सेक्टर में एआई को लेकर जो डर दिख रहा है, वह आने वाले समय में नए अवसर भी पैदा कर सकता है, लेकिन फिलहाल बाजार का मूड सतर्कता का है।