फरवरी–मार्च में वैष्णो देवी यात्रा? इन बातों का रखें ध्यान, बनेगा यादगार आध्यात्मिक सफर

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अगर आप इन दिनों मां वैष्णो देवी के दरबार में हाजिरी लगाने की तैयारी कर रहे हैं, तो यह यात्रा केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जीवन का गहरा आध्यात्मिक अनुभव बन सकती है। जम्मू-कश्मीर के त्रिकुटा पर्वत पर स्थित वैष्णो देवी मंदिर हर साल लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। “जय माता दी” के जयकारों के बीच 13 से 14 किलोमीटर की चढ़ाई आस्था, धैर्य और ऊर्जा का अनूठा संगम बन जाती है।

फरवरी और मार्च का समय यात्रा के लिए संतुलित माना जाता है। इस दौरान न तो कड़ाके की ठंड रहती है और न ही गर्मियों जैसी भीड़ उमड़ती है। मौसम सुहावना होता है, जिससे पैदल यात्रा अपेक्षाकृत आरामदायक रहती है। हालांकि, पहाड़ी इलाका होने के कारण सुबह-शाम हल्की ठंड महसूस हो सकती है, इसलिए हल्का गर्म कपड़ा साथ रखना समझदारी है।

यात्रा की शुरुआत आमतौर पर कटरा से होती है। यहां पहुंचने के बाद यात्रा पर्ची लेना अनिवार्य है। अब ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा उपलब्ध है, जिससे लंबी कतारों से बचा जा सकता है। बिना पंजीकरण आगे बढ़ने की अनुमति नहीं मिलती, इसलिए इसे यात्रा की पहली प्राथमिकता मानें।

कटरा से भवन तक की दूरी लगभग 13-14 किलोमीटर है। श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार पैदल, घोड़े, पालकी या हेलीकॉप्टर सेवा का विकल्प चुन सकते हैं। बुजुर्गों और बच्चों के लिए बैटरी कार की सुविधा भी उपलब्ध है। रास्ते में बाणगंगा, चरण पादुका और अर्धकुंवारी जैसे प्रमुख पड़ाव पड़ते हैं। विशेष रूप से अर्धकुंवारी गुफा वह स्थान है जहां माता ने साधना की थी, ऐसा माना जाता है।

भवन पहुंचकर मां के दर्शन के बाद श्रद्धालु आमतौर पर भैरवनाथ मंदिर भी जाते हैं। मान्यता है कि यहां दर्शन किए बिना यात्रा पूर्ण नहीं मानी जाती। ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यहां से आसपास के पहाड़ों का दृश्य भी मन मोह लेता है।

रहने की व्यवस्था की बात करें तो कटरा में बजट से लेकर प्रीमियम होटल तक सभी विकल्प उपलब्ध हैं। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की धर्मशालाएं और गेस्ट हाउस भी साफ-सुथरी और व्यवस्थित सुविधा प्रदान करते हैं। फरवरी-मार्च में भी वीकेंड या विशेष तिथियों पर भीड़ बढ़ सकती है, इसलिए अग्रिम बुकिंग करना बेहतर रहता है।

यात्रा के दौरान आरामदायक जूते पहनना बेहद जरूरी है, क्योंकि चढ़ाई लंबी है। पानी की बोतल, हल्का स्नैक, पहचान पत्र और मौसम के अनुसार जैकेट या रेनकोट साथ रखें। रास्ते में साफ-सफाई और प्रशासन के नियमों का पालन करना हर श्रद्धालु की जिम्मेदारी है।

अगर समय हो तो कटरा के आसपास के दर्शनीय स्थलों जैसे पटनीटॉप या शिवखोरी की यात्रा भी की जा सकती है। इससे आपका धार्मिक सफर एक छोटे पर्यटन अनुभव में बदल सकता है।

सही योजना, संतुलित तैयारी और सकारात्मक मन के साथ की गई वैष्णो देवी यात्रा निश्चित ही आपके जीवन की यादगार आध्यात्मिक यात्राओं में शामिल हो सकती है।

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