रायपुर। अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर में नए शैक्षणिक सत्र से पहले कुलपति की नियुक्ति होने की संभावना तेज हो गई है। वर्तमान कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी का कार्यकाल इस माह समाप्त हो रहा है और इसी के साथ चयन प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने समय रहते आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी थी, जिसके तहत दिसंबर के अंत तक आवेदन आमंत्रित किए गए थे।
सूत्रों के मुताबिक कुल 64 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें राज्य के वरिष्ठ प्राध्यापकों के साथ-साथ अन्य राज्यों के शिक्षाविद भी शामिल हैं। 9 फरवरी को सर्च कमेटी की बैठक आयोजित की गई, जिसमें गहन समीक्षा के बाद तीन नामों का पैनल तैयार कर राजभवन भेज दिया गया है। अब अंतिम चरण में चयनित उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा, जिसके बाद औपचारिक नियुक्ति की घोषणा की जाएगी।
गौरतलब है कि अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय को अब तक स्थानीय कुलपति नहीं मिल पाया है। पूर्व में भी अन्य राज्यों के शिक्षाविदों की ही नियुक्ति होती रही है। ऐसे में इस बार यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या विश्वविद्यालय को स्थानीय शैक्षणिक नेतृत्व मिलता है या परंपरा जारी रहती है।
सिर्फ बिलासपुर ही नहीं, बल्कि नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय रायगढ़ और पत्रकारिता विश्वविद्यालय में भी कुलपति पद लंबे समय से रिक्त हैं। पत्रकारिता विश्वविद्यालय में पूर्व कुलपति प्रो. बलदेव भाई शर्मा का कार्यकाल मार्च में समाप्त होने के बाद से प्रभारी कुलपति के भरोसे काम चल रहा है। यहां पहले जारी किया गया विज्ञापन रद्द करना पड़ा और नियमों में संशोधन के बाद दोबारा आवेदन आमंत्रित किए गए, जिससे प्रक्रिया में देरी हुई। अब यहां से भी तीन नामों का पैनल राजभवन भेजा जा चुका है।
रायगढ़ स्थित नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय में अगस्त में आवेदन मांगे गए थे, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी नियुक्ति नहीं हो पाई है। परीक्षा संबंधी कार्य तो जारी हैं, लेकिन विकास से जुड़े कई अहम निर्णय लंबित पड़े हैं। हाल ही में कुलसचिव पद पर तरुण दीवान की नियुक्ति हुई है, जिससे प्रशासनिक कार्यों में कुछ गति आने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, प्रदेश के तीन प्रमुख विश्वविद्यालयों में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया निर्णायक मोड़ पर है। शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले यदि नियुक्तियां हो जाती हैं, तो प्रशासनिक स्थिरता और विकास योजनाओं को नई दिशा मिल सकती है। अब निगाहें राजभवन के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।