छत्तीसगढ़ के दुर्ग में नाबालिग से जुड़े बहुचर्चित गैंगरेप मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे सामने आ रहे हैं। फरार चल रहे दो आरोपियों ने शुक्रवार को अदालत पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया, जबकि पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। अब तक इस केस में कुल सात लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
जानकारी के अनुसार, बीएन पांडेय और संजय पंडित ने दुर्ग कोर्ट में सरेंडर किया। बीएन पांडेय पर सांसद के पूर्व निजी सहायक होने का आरोप है, जबकि संजय पंडित पर होटल और रेस्ट हाउस संचालन से जुड़े होने का आरोप लगाया गया है। पुलिस का दावा है कि लगातार दबाव और तलाश के बीच दोनों आरोपी जिले में ही छिपे हुए थे। अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के करीब एक सप्ताह बाद दोनों ने उसी अदालत में आत्मसमर्पण किया।
इसी बीच जांच में सामने आया कि कई बार रेस्ट हाउस और होटल के कमरे भिलाई सेक्टर-10 निवासी अमित वर्मा की आईडी से बुक किए गए थे। पुलिस ने इसी आधार पर उसे भी गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि ठहरने की व्यवस्था और पहचान संबंधी दस्तावेजों के उपयोग ने पूरे घटनाक्रम को अंजाम देने में अहम भूमिका निभाई।
पीड़िता ने महिला थाने में दर्ज कराई शिकायत में आरोप लगाया है कि वर्ष 2018 से उसके साथ शोषण का सिलसिला शुरू हुआ। मां के काम पर जाने के दौरान कथित तौर पर उसे निशाना बनाया गया। बाद के वर्षों में नौकरी दिलाने, धमकाने और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर दबाव बनाया जाता रहा। विभिन्न स्थानों—रेस्ट हाउस, सर्किट हाउस और होटलों—में उसे बुलाने और दुष्कर्म करने के आरोप लगाए गए हैं।
मामले में पहले से गिरफ्तार अन्य आरोपियों में विभागीय कर्मचारी और कारोबारी शामिल बताए जा रहे हैं। अदालत में जमानत याचिकाएं दायर की गई थीं, जिन पर सुनवाई जारी है। पुलिस का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, कॉल डिटेल और बुकिंग रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।
इस पूरे मामले ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था और प्रभावशाली लोगों की भूमिका को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल जांच जारी है और पुलिस का दावा है कि तथ्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी।


