गांधी मेडिकल कॉलेज में छात्रा की संदिग्ध मौत पर आधी रात पूछताछ से बवाल, जूनियर डॉक्टर्स ने उठाए सवाल

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मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल में MBBS प्रथम वर्ष की छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। शुक्रवार देर रात पुलिस द्वारा हॉस्टल में पूछताछ किए जाने को लेकर जूनियर डॉक्टर्स ने विरोध दर्ज कराया और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।

छात्रों का आरोप है कि रात करीब 12 बजे पुलिस टीम हॉस्टल पहुंची और एक छात्रा को बयान के लिए थाने ले जाने की बात कही। इस दौरान मौजूद जूनियर डॉक्टर्स ने पुलिस से लिखित अनुमति दिखाने को कहा। उनका सवाल था कि क्या कॉलेज प्रशासन या डीन से आधिकारिक अनुमति ली गई है। छात्रों के मुताबिक, पुलिस अधिकारियों ने सिर्फ इतना कहा कि उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों से मौखिक अनुमति मिली है, लेकिन कोई लिखित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया।

बताया जा रहा है कि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शालिनी दीक्षित, एक महिला आरक्षक और अन्य पुलिसकर्मी हॉस्टल पहुंचे थे। छात्रों का कहना है कि देर रात एक छात्रा से अलग कमरे में पूछताछ की गई, जिसे वे अनुचित और मानसिक दबाव पैदा करने वाला कदम मान रहे हैं। जूनियर डॉक्टर्स का तर्क है कि मामला संवेदनशील है और ऐसी स्थिति में प्रक्रिया पारदर्शी और संस्थागत अनुमति के साथ होनी चाहिए।

मृत छात्रा रोशनी ने तीन महीने पहले ही मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लिया था। वह कोहेफिजा क्षेत्र के एक निजी पीजी में रह रही थी। उसका शव बाथरूम में मिला, जहां पास में एसिड की खाली बोतल भी बरामद हुई। घटना से कुछ समय पहले तक उसके क्लासमेट उससे संपर्क करने की कोशिश कर रहे थे। जवाब न मिलने पर बाथरूम का दरवाजा तोड़ा गया और उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।

अब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है, जिससे कई सवाल अनुत्तरित हैं। छात्र समुदाय का कहना है कि जांच प्रक्रिया संवेदनशीलता और नियमों के अनुरूप होनी चाहिए। वहीं पुलिस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

यह मामला न केवल एक छात्रा की संदिग्ध मौत से जुड़ा है, बल्कि जांच की पारदर्शिता और संस्थागत प्रक्रियाओं पर भी बहस छेड़ रहा है। आने वाले दिनों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आधिकारिक प्रतिक्रिया से स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

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