छत्तीसगढ़ में नई बार पॉलिसी लागू, अब रेस्टोरेंट में सिर्फ हाईग्रेड शराब; पार्टी लाइसेंस कलेक्टर जारी करेंगे

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रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए नई बार पॉलिसी लागू कर दी है, जिसमें कई अहम बदलाव किए गए हैं। अब राज्य के सभी स्तरीय रेस्टोरेंट में कम कीमत वाली ‘सी ग्रेड’ शराब की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। ये रेस्टोरेंट अब केवल हाईग्रेड शराब ही परोस सकेंगे। माना जा रहा है कि इस फैसले के पीछे गुणवत्ता नियंत्रण के साथ-साथ राजस्व बढ़ाने की मंशा भी शामिल है।

आबकारी विभाग के सूत्रों के अनुसार, पहले स्तरीय रेस्टोरेंट में किस श्रेणी की शराब बेची जाएगी, इस पर स्पष्ट प्रावधान नहीं था। लेकिन नई नीति में यह शर्त जोड़ दी गई है कि ऐसे प्रतिष्ठानों में केवल उच्च श्रेणी की शराब ही उपलब्ध रहेगी। इससे जहां प्रीमियम सेगमेंट को बढ़ावा मिलेगा, वहीं राज्य सरकार को अधिक कर राजस्व मिलने की संभावना जताई जा रही है। 1 अप्रैल से नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ यह नीति प्रभावी हो जाएगी।

नीति में एक और बड़ा बदलाव यह है कि होटल, बैंक्वेट हॉल या अन्य स्थानों पर आयोजित शराब पार्टियों के लिए अब आबकारी आयुक्त से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। एफएल-5 और एफएल-5 क लाइसेंस जारी करने का अधिकार अब संबंधित जिले के कलेक्टर को दिया गया है। लाइसेंस जारी करने से पहले आवेदित स्थल का नियमानुसार निरीक्षण किया जाएगा। आयोजकों को कार्यक्रम का पूरा रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा, जिसे निरीक्षण के दौरान आबकारी अधिकारियों को दिखाना होगा। शराब परोसने की अनुमति दोपहर 12 बजे से रात 12 बजे तक ही रहेगी।

नई नीति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि लाइसेंस अवधि समाप्त होने पर बची हुई शराब का पूरा विवरण प्रस्तुत करना होगा। यदि उपभोग से शेष बची शराब का विधिवत अभ्यर्पण नहीं किया गया, तो उसे अवैध माना जाएगा। शेष स्टॉक का नष्टीकरण जिला स्तर की समिति द्वारा नियमों के अनुसार किया जाएगा।

सूत्रों का कहना है कि एक दिन की पार्टी के लिए अनुमति प्रक्रिया को सरल बनाने और अवैध शराब पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से यह अधिकार कलेक्टर को सौंपा गया है। पहले फार्महाउस या अन्य निजी स्थानों पर बिना लाइसेंस शराब परोसना नियमों के विरुद्ध माना जाता था। अब आयोजनकर्ता संबंधित जिले के कलेक्टर से अनुमति लेकर वैध तरीके से आयोजन कर सकेंगे।

कुल मिलाकर, नई बार पॉलिसी राज्य में शराब बिक्री की संरचना, नियंत्रण और राजस्व व्यवस्था में बड़ा बदलाव मानी जा रही है। आने वाले समय में इसके प्रभाव का आकलन राजस्व संग्रह और अवैध बिक्री पर नियंत्रण के आधार पर किया जाएगा।

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