नई दिल्ली में प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक ऐतिहासिक बदलाव के साथ नया अध्याय शुरू कर दिया है। Narendra Modi ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री कार्यालय की नई इमारत ‘सेवा तीर्थ’ और कर्तव्य भवन-1 व 2 का उद्घाटन किया। अब तक पीएमओ रायसीना हिल्स स्थित साउथ ब्लॉक से संचालित होता था, लेकिन आज से उसका पता बदल गया है।
उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि नॉर्थ और साउथ ब्लॉक ब्रिटिश शासन की मानसिकता के प्रतीक थे। उनके अनुसार, ये इमारतें उस दौर की सोच को दर्शाती थीं जब भारत पर विदेशी हुकूमत थी। उन्होंने जोर दिया कि आज़ाद भारत को गुलामी की मानसिकता से बाहर निकलकर नई पहचान गढ़नी चाहिए।
‘सेवा तीर्थ’ कॉम्प्लेक्स की दीवार पर ‘नागरिक देवो भव’ अंकित है, जो शासन को सेवा-केन्द्रित बनाने का प्रतीक बताया गया। पीएम ने इसे कर्तव्य, करुणा और ‘भारत सर्वोपरि’ की भावना का प्रतिनिधि बताया। उद्घाटन के बाद उन्होंने महिलाओं, युवाओं और कमजोर वर्गों से जुड़े कई प्रस्तावों की फाइलों पर हस्ताक्षर भी किए।
करीब 2.26 लाख वर्ग फीट में फैला यह कॉम्प्लेक्स सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का हिस्सा है। ₹1189 करोड़ की लागत से निर्मित इस परिसर में तीन इमारतें हैं—सेवा तीर्थ-1 (PMO), सेवा तीर्थ-2 (कैबिनेट सचिवालय) और सेवा तीर्थ-3 (NSCS व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का कार्यालय)। पहले ये सभी विभाग अलग-अलग भवनों में कार्यरत थे।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि विकसित भारत 2047 की सोच केवल नीतियों में नहीं, बल्कि कार्यस्थलों और इमारतों में भी झलकनी चाहिए। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पुराने भवन जर्जर हो चुके थे और आधुनिक तकनीकी जरूरतों के अनुरूप नहीं थे। कई मंत्रालय अलग-अलग स्थानों पर संचालित होने से हर साल लगभग 1500 करोड़ रुपये किराए पर खर्च हो रहे थे। नए कॉम्प्लेक्स में मंत्रालयों के एकीकृत होने से लागत में कमी और प्रशासनिक समन्वय बेहतर होने की उम्मीद है।
कर्तव्य भवन-1 और 2 में वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि सहित कई मंत्रालयों को स्थान दिया गया है। भवनों को 4-स्टार GRIHA मानकों के अनुरूप पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों से तैयार किया गया है। इनमें सौर ऊर्जा, जल संरक्षण प्रणाली और उन्नत सुरक्षा तंत्र शामिल हैं।
सरकार की योजना है कि ऐतिहासिक North Block और South Block को ‘युगे-युगेन भारत नेशनल म्यूजियम’ में परिवर्तित किया जाए, जहां हजारों कलाकृतियों के माध्यम से भारत की सभ्यता और इतिहास को प्रदर्शित किया जाएगा।
‘सेवा तीर्थ’ का उद्घाटन केवल एक नए भवन की शुरुआत नहीं, बल्कि शासन को ‘सत्ता से सेवा’ की ओर मोड़ने का प्रतीकात्मक कदम बताया जा रहा है। अब देखना होगा कि यह बदलाव प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जनता की भागीदारी में किस तरह प्रभाव डालता है।