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नक्सल मोर्चे पर निर्णायक चरण—बस्तर के सिर्फ तीन जिले शेष, ‘फाइनल ऑपरेशन’ की तैयारी तेज

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छत्तीसगढ़ की धरती पर लंबे समय से जारी नक्सलवाद के खिलाफ जंग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। भारत सरकार ने नक्सल प्रभावित जिलों की नई सूची जारी कर संकेत दिया है कि देश अब अंतिम चरण की रणनीति की ओर बढ़ चुका है। ताज़ा सूची के मुताबिक पूरे देश में अब केवल 6 जिलों को ही नक्सल प्रभावित श्रेणी में रखा गया है। इनमें बस्तर संभाग के सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर शामिल हैं। इसके साथ ही गरियाबंद को भी सूची में रखा गया है, जबकि अन्य दो जिले दूसरे राज्यों से हैं।

यह बदलाव केवल प्रशासनिक आंकड़ा नहीं, बल्कि वर्षों की सुरक्षा कार्रवाई, संयुक्त ऑपरेशनों और खुफिया नेटवर्क की सफलता का संकेत माना जा रहा है। बस्तर के जिन जिलों को नक्सल मुक्त घोषित किया गया है, वहां सामान्य जनजीवन की वापसी और विकास परियोजनाओं की रफ्तार तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, अब इन छह चिन्हित जिलों में ‘फाइनल ऑपरेशन’ की रणनीति पर काम शुरू हो चुका है। सुरक्षा एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि बचे हुए इलाकों में समन्वित और सटीक कार्रवाई की जाए। बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी ने संकेत दिया है कि सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर को हाई अलर्ट पर रखा गया है। इन जिलों में एंटी-नक्सल ऑपरेशन तेज कर दिए गए हैं और सुरक्षा बलों की तैनाती रणनीतिक रूप से मजबूत की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या में यह कमी केवल सुरक्षा दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक परिप्रेक्ष्य में भी महत्वपूर्ण है। जिन इलाकों में हिंसा का साया कम हुआ है, वहां सड़क, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार आसान होगा। निवेशकों के लिए भी यह सकारात्मक संकेत है, क्योंकि सुरक्षा स्थिति स्थिर होने से औद्योगिक और कृषि गतिविधियों को गति मिल सकती है।

केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त रणनीति—सुरक्षा, विकास और संवाद—अब अपने अंतिम लक्ष्य की ओर बढ़ती दिख रही है। हालांकि बचे हुए जिलों में चुनौती अभी भी गंभीर है, लेकिन प्रशासनिक आत्मविश्वास साफ नजर आ रहा है।

यदि यह ‘अंतिम चरण’ सफल रहता है, तो बस्तर सहित पूरे क्षेत्र में शांति और स्थिरता का नया अध्याय शुरू हो सकता है। वर्षों से संघर्ष झेल रहे इलाकों के लिए यह बदलाव केवल सुरक्षा अभियान की सफलता नहीं, बल्कि सामान्य जीवन की वापसी और विकास की नई सुबह का संकेत भी हो सकता है।

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