छत्तीसगढ़ की सियासत में 24 फरवरी की तारीख अहम होने जा रही है। राज्य विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत 23 फरवरी से होगी और उसके ठीक अगले दिन वित्त मंत्री ओपी चौधरी सदन में वित्तीय वर्ष 2026-27 का बहुप्रतीक्षित बजट पेश करेंगे। सरकार पहले ही संकेत दे चुकी है कि इस बार का बजट सिर्फ आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि प्राथमिकताओं का स्पष्ट संदेश होगा—और यह संदेश महिलाओं, युवाओं और किसानों के नाम होगा।
वित्त मंत्री का कहना है कि बजट तैयार करते समय हर वर्ग का ध्यान रखा गया है, लेकिन विशेष फोकस उन तबकों पर है जो राज्य की सामाजिक और आर्थिक ताकत माने जाते हैं। सरकार की मंशा है कि बजट के जरिए प्रदेश के विकास को नई रफ्तार दी जाए और जनहितकारी योजनाओं को और मजबूत आधार मिले। राजनीतिक गलियारों में इसे सरकार के विज़न डॉक्यूमेंट के रूप में भी देखा जा रहा है।
इस बार इंफ्रास्ट्रक्चर और डेवलपमेंट को बजट का बड़ा आधार बनाया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक छोटे और मंझोले शहरों में खेल सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। खेल मैदानों के विकास और यातायात सुधार के लिए रिंग रोड जैसी परियोजनाओं को प्राथमिकता मिल सकती है। नवा रायपुर स्थित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में शहीद वीर नारायण सिंह की प्रतिमा स्थापित करने का भी प्रस्ताव है, जिससे खेल और गौरव—दोनों को जोड़ने की कोशिश दिखाई दे रही है।
ग्रामीण और अर्धशहरी इलाकों में भी खेल ढांचे को मजबूत करने की तैयारी है। नगर पंचायत पखांजूर में खेल परिसर की स्थापना और दुलदुला में मिनी इंडोर स्टेडियम के निर्माण का प्रावधान किया जा सकता है। दुर्ग की पहली बटालियन में बने इंडोर स्टेडियम से जुड़े लंबित कार्यों को पूरा करने के लिए करीब एक करोड़ रुपये की राशि रखने की चर्चा है। सारंगढ़ के इंडोर स्टेडियम के नवीनीकरण को भी बजट में जगह मिल सकती है। इससे साफ संकेत है कि सरकार खेल अवसंरचना को सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रखना चाहती।
सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है—अनावश्यक योजनाओं पर खर्च में कटौती। इस बार कई विभागों की गैर जरूरी योजनाओं की राशि कम की जा सकती है, ताकि संसाधनों का उपयोग अधिक प्रभावी तरीके से हो सके। बचाई गई राशि को बुनियादी ढांचे और प्राथमिक योजनाओं की ओर मोड़ा जाएगा। इसे वित्तीय अनुशासन की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
प्रदेश के बड़े नगर पंचायतों और नगर पालिकाओं में रिंग रोड निर्माण की व्यापक योजना भी चर्चा में है। इसके लिए लगभग सौ करोड़ रुपये तक का प्रावधान किए जाने की तैयारी बताई जा रही है। यदि यह प्रस्ताव मूर्त रूप लेता है, तो ट्रैफिक प्रबंधन और शहरी विस्तार को नई दिशा मिल सकती है।
शिक्षा और सामाजिक योजनाओं को भी बजट में मजबूती मिलने के संकेत हैं। जिन जिलों में नालंदा लाइब्रेरी अब तक नहीं बन पाई हैं, वहां इसके लिए राशि उपलब्ध कराई जा सकती है। केंद्र की पीएम सूर्यघर योजना और आयुष्मान योजना के लिए लगभग दो हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किए जाने की संभावना जताई जा रही है, जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को सीधा लाभ मिल सकता है।
कुल मिलाकर, 24 फरवरी को पेश होने वाला यह बजट सिर्फ वित्तीय घोषणा नहीं, बल्कि विकास, बुनियादी ढांचे, सामाजिक सुरक्षा और खेल संस्कृति को साथ लेकर चलने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। अब नजरें विधानसभा के उस दिन पर टिकी हैं, जब सरकार अपने इरादों को कागज से जमीन तक ले जाने का खाका पेश करेगी।