भारतीय समाज में कभी घर खरीदने से पहले लंबी बचत को जरूरी माना जाता था—“पहले पैसा जोड़ो, फिर मकान लो”। लेकिन अब यह सोच तेजी से बदल रही है। ताजा सर्वे के मुताबिक देश में बिकने वाले 74% घर 35 साल से कम उम्र के लोग खरीद रहे हैं। इनमें 32% खरीदार तो 25 साल से भी कम उम्र के हैं। पिछले छह साल में घर खरीदने वालों की औसत उम्र 38 से घटकर 34 साल हो गई है, जो रियल एस्टेट बाजार में बड़ा बदलाव दर्शाती है।
होम लोन एग्रीगेशन और डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म ‘बेसिक होम लोन’ के सर्वे ‘घर का सपना कैसे पूरा करता है भारत’ में सामने आया कि नई पीढ़ी नौकरी लगते ही घर लेने की योजना बनाने लगी है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तेज लोन प्रोसेसिंग और आसान आवेदन प्रक्रिया युवाओं को आकर्षित कर रही है। हालांकि भरोसा अब भी बड़ा कारक है—ज्यादातर युवा उसी वित्तीय संस्था से लोन लेना चाहते हैं, जिसकी बाजार में कम से कम 50 साल की साख हो।
सर्वे 23 हजार लोगों पर आधारित था। इनमें 31% की सालाना आय 50 लाख रुपये से अधिक थी। 5 लाख रुपये तक कमाने वाले 29%, 5 से 10 लाख वाले 20%, 11 से 20 लाख वाले 7%, 21 से 35 लाख वाले 4% और 36 से 40 लाख तक आय वाले 9% लोग शामिल थे। प्रतिभागियों में 91% पुरुष और 9% महिलाएं थीं, लेकिन महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2024 में शीर्ष शहरों में महिलाओं ने 1.29 लाख आवासीय संपत्तियां खरीदीं, जो कुल डील का 14% हिस्सा था।
होम लोन चुनते समय युवाओं के लिए ब्याज दर सबसे अहम फैक्टर है। मिलेनियल और Gen-Z के लगभग 50% उत्तरदाताओं ने कहा कि ब्याज दरों में थोड़ी सी भी कमी-बढ़ोतरी उनके फैसले को प्रभावित करती है। इसके अलावा लोन अप्रूवल की गति भी बड़ी भूमिका निभाती है। नई पीढ़ी ऐसे बैंक या प्लेटफॉर्म को प्राथमिकता देती है, जो 24 से 48 घंटे में प्रोसेसिंग पूरी कर दें।
भरोसा और पारदर्शिता भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। 60 वर्ष से अधिक आयु के 33% लोग अब भी लोन के लिए बैंक शाखा जाना पसंद करते हैं। सर्वे में 76% लोगों ने माना कि ज्यादा दस्तावेजों की मांग और छिपे शुल्क होम लोन की राह में बड़ी बाधा बनते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के 47% लोगों ने पेपरवर्क को समस्या बताया, जबकि मेट्रो शहरों में यह आंकड़ा 45% रहा।
दिलचस्प बात यह है कि Gen-Z घर खरीदने के फैसले में दोस्तों की सलाह कम मानते हैं। 21-24 वर्ष के सिर्फ 9% लोग दोस्तों की राय पर लोन लेते हैं, जबकि 50-60 आयु वर्ग में यह आंकड़ा 14% तक पहुंच जाता है।
ईएमआई देने की तैयारी भी आय वर्ग के अनुसार बदलती है। 5 लाख रुपये तक सालाना आय वाले लोग अपनी आमदनी का 25% तक ईएमआई देने को तैयार हैं। 11 से 40 लाख रुपये आय वाले करीब 40% तक ईएमआई चुकाने की इच्छा जताते हैं, जबकि इससे ऊपर आय वर्ग के लोग 50% तक राशि ईएमआई में लगाने को तैयार दिखे।
कुल मिलाकर, भारत में घर खरीदने का ट्रेंड तेजी से युवा होता जा रहा है। डिजिटल सुविधा, तेज लोन अप्रूवल और बढ़ती आय के साथ Gen-Z और मिलेनियल अब किराए से आगे बढ़कर जल्दी अपना घर चाहते हैं। रियल एस्टेट बाजार में यह बदलाव आने वाले वर्षों में और गहरा होने की संभावना है।