रायपुर में दैनिक श्रमिक मोर्चा के बैनर तले काम कर रहे सात अलग-अलग विभागों के 134 कर्मचारियों ने स्थायीकरण की मांग को लेकर न्यायिक लड़ाई शुरू कर दी है। कर्मचारियों ने 1948 के कानून की धारा 61 और 63 के तहत हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उनका कहना है कि यह मुकदमा केवल स्थायीकरण के अधिकार के लिए है, नियमितीकरण से इसका सीधा संबंध नहीं है।
मोर्चा से जुड़े प्रतिनिधियों के अनुसार, लंबे समय से सेवा दे रहे दैनिक वेतनभोगी और संविदा कर्मचारी अपने भविष्य को लेकर असमंजस में हैं। उनका तर्क है कि वर्षों तक काम लेने के बाद भी उन्हें स्थायी दर्जा नहीं दिया गया, जिससे वे सामाजिक और आर्थिक असुरक्षा का सामना कर रहे हैं।
इस मुद्दे को लेकर मोर्चा ने राज्य सरकार के मंत्रियों—गजेंद्र यादव, ओपी चौधरी—और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में मध्य प्रदेश की तर्ज पर स्थायीकरण योजना लागू करने की मांग की गई है। मोर्चा ने आग्रह किया है कि प्रस्तावित योजना को ‘माता कौशल्या’ के नाम से इसी बजट सत्र में लागू किया जाए।
इसके अलावा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरणदेव के माध्यम से राज्यपाल रमेन डेका को भी ज्ञापन सौंपा गया है।
मोर्चा का कहना है कि चार नई श्रम संहिताओं के पूर्ण रूप से लागू होने के बाद पुराने स्थायीकरण कानून की स्थिति स्पष्ट नहीं रहेगी, इसलिए 31 मार्च 2026 से पहले सभी 57 विभागों के पात्र दैनिक श्रमिकों और संविदा कर्मचारियों के लिए विशेष योजना लाना आवश्यक है। उन्होंने मध्य प्रदेश में वर्ष 2016 और 2023 में लागू की गई स्थायीकरण योजनाओं का हवाला देते हुए छत्तीसगढ़ में भी समान पहल की मांग की है।
अब यह मामला न्यायालय और सरकार—दोनों के स्तर पर विचाराधीन है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि या तो कोर्ट से राहत मिलेगी या फिर सरकार बजट सत्र में ठोस निर्णय लेकर उनकी मांगों को संबोधित करेगी।