बिजली टैरिफ पर घमासान! जनसुनवाई में उठी एक सुर में आवाज—‘बिजली के दाम न बढ़ें’

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छत्तीसगढ़ में बिजली दरों को लेकर माहौल गरमाने लगा है। 65 लाख से अधिक उपभोक्ताओं वाले प्रदेश में नए टैरिफ प्रस्ताव पर सुनवाई शुरू होते ही विरोध की आवाजें सामने आने लगी हैं। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने पहली बार राजधानी से बाहर क्षेत्रीय दफ्तरों में जनसुनवाई आयोजित कर प्रक्रिया को व्यापक बनाने की कोशिश की है, लेकिन शुरुआती दिनों में भागीदारी सीमित रही। जो भी पहुंचे, उन्होंने लगभग एक सुर में यही मांग रखी—बिजली की कीमतें न बढ़ाई जाएं।

मंगलवार को दुर्ग, बिलासपुर और राजनांदगांव में हुई सुनवाई में कुल मिलाकर मुश्किल से एक दर्जन उपभोक्ता पहुंचे। दुर्ग में सुबह 10:30 से 12 बजे तक चली बैठक में सिर्फ चार लोग शामिल हुए। इनमें बीएसपी से जुड़े विजय देशमुख के अलावा राधेश्याम अग्रवाल, मेहरबान सिंह और संतोष साहू ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। उनका तर्क साफ था—मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में बिजली दरों में बढ़ोतरी आम उपभोक्ता और उद्योग, दोनों पर अतिरिक्त बोझ डालेगी।

बिलासपुर में दोपहर 12 से 1:30 बजे के बीच हुई सुनवाई में तीन उपभोक्ता पहुंचे—हरीश केडिया, संतोष कुमार साव और शरद सक्सेना। यहां एमएसएमई और लघु उद्योगों का मुद्दा प्रमुख रहा। प्रतिनिधियों ने कहा कि उत्पादन लागत पहले ही बढ़ी हुई है, ऐसे में बिजली दरों में इजाफा छोटे उद्योगों को और दबाव में डाल देगा। राजनांदगांव में अंतिम सत्र में छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स से जुड़े सुमन सरकार, कमलेश जैन, राजकुमार बत्रा और राजेश जैन ने भी विरोध दर्ज कराया। एक विधायक प्रतिनिधि रूपचंद भी पहुंचे और दर वृद्धि के खिलाफ स्वर मिलाया।

अब नजर बुधवार की सुनवाई पर है। अंबिकापुर में सुबह 10 से 12 बजे या 1:30 बजे तक, जगदलपुर में 12 बजे से और रायगढ़ में दोपहर 3 से 4:30 बजे तक जनसुनवाई प्रस्तावित है। आयोग का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक उपभोक्ता अपनी राय रखें, ताकि अंतिम निर्णय से पहले सभी पक्षों को सुना जा सके।

सबसे ज्यादा हलचल 19 और 20 फरवरी को रायपुर में होने वाली सुनवाई को लेकर है। आयोग के दफ्तर में 19 फरवरी को कृषि, घरेलू और गैर-घरेलू वर्गों की अलग-अलग समय स्लॉट में सुनवाई होगी, जबकि 20 फरवरी को स्थानीय निकाय, ट्रेड यूनियन, निम्न दाब उद्योग और उच्च दाब उपभोक्ताओं के लिए अलग सत्र तय किए गए हैं। राजनीतिक रंग भी इस मुद्दे पर चढ़ता दिख रहा है। कांग्रेस ने बिजली दर वृद्धि का खुला विरोध किया है और पूर्व विधायक विकास उपाध्याय बड़ी संख्या में समर्थकों के साथ पहुंचने की तैयारी में हैं।

जनसुनवाई का मकसद सुझाव और आपत्तियां सुनना है, लेकिन जिस तरह से विपक्ष और विभिन्न उपभोक्ता वर्ग लामबंद हो रहे हैं, उससे संकेत मिल रहे हैं कि रायपुर में होने वाली बैठकें महज औपचारिक नहीं रहेंगी। बिजली टैरिफ का फैसला आर्थिक संतुलन और राजनीतिक दबाव—दोनों के बीच तय होगा। फिलहाल संदेश स्पष्ट है—प्रदेश के उपभोक्ता किसी भी संभावित बढ़ोतरी को लेकर सतर्क और मुखर हैं।

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