दुनिया के दिग्गज निवेशक Warren Buffett ने एक बार फिर अपने निवेश फैसलों से बाजार को चौंका दिया है। उनकी कंपनी Berkshire Hathaway ने हालिया तिमाही में पोर्टफोलियो में बड़ा फेरबदल करते हुए टेक सेक्टर से आंशिक दूरी बनाई है और मीडिया तथा ऊर्जा क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत की है।
अमेजन में हिस्सेदारी 75% से ज्यादा घटाई
रेगुलेटरी फाइलिंग के मुताबिक अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के दौरान बर्कशायर ने Amazon में अपनी हिस्सेदारी 75 प्रतिशत से अधिक कम कर दी। अब कंपनी के पास अमेजन के केवल लगभग 23 लाख शेयर बचे हैं।
बफेट ने 2019 में पहली बार अमेजन में निवेश किया था और तब उन्होंने स्वीकार किया था कि इस टेक दिग्गज में निवेश करने में वे देर कर गए। अब इतनी बड़ी कटौती को विश्लेषक रणनीतिक बदलाव के संकेत के रूप में देख रहे हैं, खासकर ऐसे समय में जब टेक शेयर ऊंचे वैल्यूएशन पर कारोबार कर रहे हैं।
न्यूयॉर्क टाइम्स में बड़ा निवेश
टेक से पैसा निकालते हुए बफेट ने मीडिया क्षेत्र में भरोसा दिखाया है। बर्कशायर ने The New York Times Company के 51 लाख शेयर खरीदे। साल के अंत तक इस निवेश की अनुमानित कीमत लगभग 35.17 करोड़ डॉलर रही।
इस खबर के बाद न्यूयॉर्क टाइम्स के शेयरों में 10% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। यह कदम बताता है कि बफेट पारंपरिक और डिजिटल पब्लिशिंग मॉडल में संभावनाएं देख रहे हैं।
एप्पल और बैंक ऑफ अमेरिका में भी कटौती
बर्कशायर ने अपने अन्य बड़े निवेशों में भी बदलाव किया है। कंपनी ने Apple Inc. में हिस्सेदारी घटाकर लगभग 1.5% कर दी, जबकि Bank of America में हिस्सेदारी घटाकर 7.1% कर दी गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि बफेट महंगे वैल्यूएशन वाली टेक कंपनियों से मुनाफावसूली कर रहे हैं और पूंजी को अधिक स्थिर और वैल्यू-आधारित क्षेत्रों में शिफ्ट कर रहे हैं।
एनर्जी और इंश्योरेंस सेक्टर पर फोकस
नई रणनीति के तहत बर्कशायर ने ऊर्जा और बीमा सेक्टर में अपनी पकड़ मजबूत की है। कंपनी ने Chevron Corporation और Chubb में निवेश बढ़ाया है।
इसके अलावा, बर्कशायर ने Alphabet Inc. में भी अपनी पोजीशन बनाई है, जो यह दर्शाता है कि बफेट टेक सेक्टर से पूरी तरह बाहर नहीं हुए हैं, बल्कि चयनात्मक निवेश की रणनीति अपना रहे हैं।
भविष्य की तैयारी?
बाजार जानकारों का मानना है कि बफेट अपने उत्तराधिकारी ग्रेग एबेल को कमान सौंपने से पहले पोर्टफोलियो को संतुलित और स्थिर बनाना चाहते हैं। टेक में कटौती और ऊर्जा-बीमा में बढ़त इस ओर इशारा करती है कि वे आने वाले आर्थिक उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखकर दीर्घकालिक रणनीति बना रहे हैं।
कुल मिलाकर, यह बदलाव दिखाता है कि वॉरेन बफेट अभी भी वैल्यू इन्वेस्टिंग के सिद्धांतों पर कायम हैं—महंगे शेयरों से दूरी और मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों पर भरोसा।