19 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में अनिल अंबानी ने वचन दिया कि अदालत की अनुमति के बिना वे भारत से बाहर नहीं जाएंगे। यह कदम उनके समूह Reliance Anil Dhirubhai Ambani Group (ADAG) से जुड़ी कथित ₹40,000 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी की जांच के बीच उठाया गया है। अंबानी ने यह भी आश्वस्त किया कि वे Enforcement Directorate (ED) और Central Bureau of Investigation (CBI) की जांच में पूरा सहयोग करेंगे।
यह लिखित अंडरटेकिंग उस मौखिक आश्वासन की औपचारिक पुष्टि मानी जा रही है, जो 4 फरवरी को उनके वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने अदालत में दिया था। अब हलफनामा दाखिल होने से यह प्रतिबद्धता कानूनी रूप से दर्ज हो गई है।
मामला क्या है?
पूर्व ब्यूरोक्रेट ईएएस सरमा की याचिका पर सुनवाई के दौरान आरोप लगाए गए कि ADAG समूह की कंपनियों ने विभिन्न बैंकों के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर लोन फ्रॉड किया। याचिकाकर्ता ने जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग की है। अदालत ने मामले की गंभीरता देखते हुए एजेंसियों को जांच तेज करने और बैंक अधिकारियों की संभावित भूमिका की भी पड़ताल करने के निर्देश दिए हैं।
जांच में क्या सामने आया?
ED की शुरुआती जांच में रिलायंस होम फाइनेंस (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस (RCFL) में फंड्स के कथित गलत इस्तेमाल की बात सामने आई। 2017–2019 के बीच यस बैंक द्वारा किए गए निवेश बाद में NPA में बदल गए। जांच एजेंसी के अनुसार, कुछ फंड्स को समूह की अन्य कंपनियों में डायवर्ट किए जाने के संकेत मिले हैं। लोन अप्रूवल प्रक्रिया में भी कथित अनियमितताओं—जैसे उसी दिन आवेदन-अनुमोदन-डिस्बर्सल, फील्ड चेक का अभाव और अधूरे दस्तावेज—का उल्लेख किया गया है। कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की जा रही है, और अक्टूबर 2025 में अटैचमेंट आदेश जारी किए गए थे।
फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अंडरटेकिंग से स्पष्ट है कि अंबानी जांच प्रक्रिया में उपस्थित रहेंगे और एजेंसियों के साथ सहयोग करेंगे। आगे की कार्यवाही और अदालत के निर्देशों पर सभी की नजरें टिकी हैं।