बिलासपुर में सराफा कारोबारी से हुई करोड़ों की लूट ने पूरे शहर को हिला दिया था, लेकिन महज 72 घंटे के भीतर पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल वारदात की परतें खोलते हुए मास्टरमाइंड समेत पांच आरोपियों को दबोच लिया। इस गिरोह का सरगना विजय लांबा बताया जा रहा है, जिसके खिलाफ हत्या, लूट और डकैती जैसे गंभीर अपराधों के 70 से अधिक मामले दर्ज हैं।
जांच में सामने आया कि इस खतरनाक नेटवर्क की नींव दिल्ली की तिहाड़ जेल में पड़ी थी। वहीं विजय लांबा की मुलाकात उत्तरप्रदेश के गौतमबुद्धनगर निवासी मोनू उर्फ राहुल उर्फ रोहित से हुई। जेल से बाहर आते ही दोनों ने मिलकर छत्तीसगढ़ में बड़ी वारदात को अंजाम देने की योजना बनाई। दो महीने पहले होटल कारोबारी को निशाना बनाने की नाकाम कोशिश ने गिरोह को झटका जरूर दिया, लेकिन उसी असफलता ने उन्हें और बड़ा शिकार चुनने के लिए उकसा दिया।
17 फरवरी की रात करीब 9:15 बजे सरकंडा क्षेत्र के सराफा कारोबारी संतोष तिवारी अपनी दुकान महालक्ष्मी ज्वेलर्स से गहनों से भरा बैग लेकर घर लौट रहे थे। टेलीफोन एक्सचेंज रोड के मोड़ पर पहले से घात लगाए बैठे बदमाशों ने उनकी कार को टक्कर मारकर विवाद खड़ा किया। पिस्टल दिखाकर उन्हें काबू में किया गया और हथौड़े से सिर पर हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया गया। इसके बाद आरोपी कार समेत सोने के जेवर और नकदी लेकर फरार हो गए।
वारदात के बाद चार आरोपी उत्तरप्रदेश भाग निकले, जहां मिर्जापुर में पुलिस से मुठभेड़ के दौरान दो के पैर में गोली लगी और सभी चारों को पकड़ लिया गया। उनके पास से करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये का सोना, डेढ़ लाख नकद और हथियार बरामद हुए। पांचवां आरोपी बिलासपुर से गिरफ्तार किया गया।
पूरी साजिश बेहद संगठित तरीके से रची गई थी। आरोपियों ने पुलिस को गुमराह करने के लिए अलग-अलग जिलों से वाहन चोरी किए। अंबिकापुर से बाइक और अकलतरा से कार चुराई गई। लूट के बाद वाहन बदलते हुए जंगल के रास्तों से फरारी की गई। जांच में खुलासा हुआ कि करीब 20 दिन पहले ही कारोबारी की रेकी कर ली गई थी। गिरोह के सदस्य विनोद, जो पहले बिलासपुर आ चुका था, ने दुकान और घर की गतिविधियों पर नजर रखी थी।
मामले में CCTV फुटेज निर्णायक साबित हुए। महालक्ष्मी ज्वेलर्स के सामने लगे कैमरों से विजय लांबा की पहचान हुई। इसके बाद पुराने लूट मामले में गिरफ्तार गगनदीप से पूछताछ कर तकनीकी सुराग जुटाए गए, जिससे पूरी कड़ी जुड़ती चली गई।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक विजय लांबा 1991 से अपराध की दुनिया में सक्रिय है। दिल्ली और हरियाणा समेत कई राज्यों में उसके खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज हैं। उसके साथियों पर भी एक दर्जन से अधिक आपराधिक मामले हैं। तिहाड़ में हुई दोस्ती ने इस गिरोह को एक बार फिर सक्रिय कर दिया था।
अब मिर्जापुर में गिरफ्तार आरोपियों को प्रोडक्शन वारंट पर बिलासपुर लाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। कोर्ट में पेशी के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जब्त किए गए 3.768 किलोग्राम आभूषण और अन्य सबूतों के आधार पर पुलिस इस संगठित अपराध नेटवर्क की और कड़ियों की जांच में जुटी है।
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि जेल की सलाखों के पीछे पनपने वाली आपराधिक सांठगांठ बाहर निकलते ही बड़े अपराध में बदल सकती है। हालांकि इस बार तेज कार्रवाई ने साफ संदेश दिया है कि संगठित अपराध पर शिकंजा कसने में पुलिस पीछे नहीं हटेगी।



