घुटनों का दर्द कभी बढ़ती उम्र की पहचान माना जाता था, लेकिन अब यह समस्या युवाओं को भी तेजी से घेर रही है। 30-35 की उम्र में ही सीढ़ियां चढ़ते समय दर्द, जकड़न और भारीपन महसूस होना आम होता जा रहा है। घंटों ऑफिस में बैठकर काम करना, शारीरिक गतिविधि की कमी, बढ़ता वजन और असंतुलित लाइफस्टाइल इसके प्रमुख कारण बन रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआत में दिखने वाले हल्के लक्षणों को नजरअंदाज करना आगे चलकर गंभीर समस्या में बदल सकता है। हालांकि राहत की बात यह है कि कुछ सरल और प्राकृतिक उपाय अपनाकर घुटनों के दर्द को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
सबसे जरूरी है नियमित और हल्की एक्सरसाइज। घुटनों को मजबूत रखने के लिए रोजाना 20 से 30 मिनट की वॉक, साइकलिंग या स्विमिंग जैसे लो-इम्पैक्ट व्यायाम फायदेमंद माने जाते हैं। इससे जोड़ों में लचीलापन बना रहता है और आसपास की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। जब क्वाड्रिसेप्स और हैमस्ट्रिंग मसल्स मजबूत रहती हैं तो घुटनों पर पड़ने वाला दबाव कम हो जाता है।
वजन नियंत्रण भी बेहद अहम भूमिका निभाता है। शरीर का अतिरिक्त वजन सीधे घुटनों पर असर डालता है। हर एक अतिरिक्त किलो कई गुना दबाव बढ़ा सकता है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और सक्रिय जीवनशैली अपनाकर वजन नियंत्रित रखने से दर्द में स्पष्ट कमी आ सकती है।
घरेलू उपायों में हल्दी और अदरक का सेवन भी लाभकारी माना जाता है। हल्दी में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण सूजन कम करने में मदद कर सकते हैं। रोजाना गुनगुने दूध में आधा चम्मच हल्दी मिलाकर पीना कई लोगों के लिए राहतदायक साबित हुआ है। अदरक की चाय भी जोड़ों के दर्द में आराम पहुंचाने के लिए जानी जाती है।
अगर घुटनों में सूजन है तो ठंडी सिकाई 10 से 15 मिनट तक करने से आराम मिल सकता है। वहीं जकड़न या अकड़न की स्थिति में हल्की गर्म सिकाई फायदेमंद रहती है। जरूरत के अनुसार डॉक्टर की सलाह से हॉट और कोल्ड थेरेपी अपनाई जा सकती है।
हड्डियों की मजबूती के लिए कैल्शियम और विटामिन डी बेहद जरूरी हैं। दूध, दही, पनीर जैसे खाद्य पदार्थों का सेवन और रोजाना कुछ समय धूप में बिताना हड्डियों के लिए लाभकारी है। यदि शरीर में इन पोषक तत्वों की कमी हो तो विशेषज्ञ की सलाह पर सप्लीमेंट भी लिया जा सकता है।
इसके साथ ही बैठने और उठने की आदतों पर भी ध्यान देना जरूरी है। लंबे समय तक एक ही पोजीशन में बैठे रहना घुटनों पर दबाव बढ़ाता है। हर 45 से 60 मिनट में थोड़ा चलना-फिरना फायदेमंद है। जमीन पर लंबे समय तक पालथी मारकर बैठने या जरूरत से ज्यादा सीढ़ियां चढ़ने से भी बचना चाहिए।
समय रहते सावधानी बरतने और जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करने से घुटनों के दर्द को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। अगर दर्द लगातार बना रहे, सूजन बढ़े या चलने-फिरने में कठिनाई हो तो तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत है। किसी भी उपाय को अपनाने से पहले योग्य डॉक्टर या विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।