अमेरिका ने भारतीय आयात पर लागू टैरिफ दर 18 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत कर दी है। पहली नजर में यह फैसला राहत जैसा दिखता है, लेकिन भारतीय टेक्सटाइल और परिधान निर्यातकों के लिए यह स्थिति उतनी सरल नहीं है। वैश्विक टैरिफ संरचना में बदलाव के कारण भारत की वह मामूली प्रतिस्पर्धी बढ़त, जो कुछ एशियाई देशों पर थी, अब लगभग खत्म होती दिख रही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की व्यापार नीतियों में लगातार बदलाव ने उद्योग जगत में असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। पहले लगाए गए इमरजेंसी टैरिफ को अब वापस लेते हुए अमेरिकी सरकार 18 प्रतिशत की दर घटाकर 15 प्रतिशत करने जा रही है। साथ ही 15 प्रतिशत के फ्लैट ग्लोबल टैरिफ ढांचे की घोषणा ने बाजार को नई दिशा दी है।
हालांकि दर में कमी से लागत कुछ घटेगी, लेकिन समस्या यह है कि अब प्रतिस्पर्धी देश भी लगभग समान स्तर पर आ गए हैं। क्लोदिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CMAI) के मुख्य मेंटर राहुल मेहता के अनुसार, कारोबार कठिन परिस्थितियों में चल सकता है, लेकिन अनिश्चित परिस्थितियों में दीर्घकालिक योजना बनाना बेहद मुश्किल हो जाता है। पहले भारत पर 18 प्रतिशत टैरिफ था, जबकि बांग्लादेश पर 19 प्रतिशत और वियतनाम पर 20 प्रतिशत शुल्क लागू था। इस अंतर से भारतीय निर्यातकों को हल्का प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलता था, जो अब लगभग समाप्त हो गया है।
अमेरिका भारत के लिए सबसे बड़ा टेक्सटाइल निर्यात बाजार बना हुआ है। कुल अमेरिकी टेक्सटाइल आयात में भारत की हिस्सेदारी करीब 28 प्रतिशत है। वित्त वर्ष 2024 में भारत ने अमेरिका को लगभग 10.05 अरब डॉलर का निर्यात किया, जिसमें परिधान का हिस्सा सबसे अधिक रहा। इसके बाद होम टेक्सटाइल, बेड लिनन, तौलिए, कालीन, पर्दे और अपहोल्स्ट्री उत्पादों का स्थान है।
वित्त वर्ष 2025 में भारत का कुल टेक्सटाइल और परिधान निर्यात करीब 38 अरब डॉलर तक पहुंचा। ऐसे में अमेरिकी बाजार में मामूली भी नीति परिवर्तन का सीधा असर भारतीय उद्योग पर पड़ता है। नई टैरिफ दर लागू होने के बाद कई निर्यातकों को अपने मौजूदा अनुबंधों की कीमतों की समीक्षा करनी पड़ रही है।
चुनौती यह भी है कि चीन और बांग्लादेश जैसे देश भी आक्रामक रणनीति के साथ बाजार में सक्रिय हैं। जब सभी देश लगभग समान टैरिफ दर पर पहुंच जाते हैं, तो प्रतिस्पर्धा केवल कीमत, गुणवत्ता और आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता पर निर्भर हो जाती है।
कुल मिलाकर, 15 प्रतिशत टैरिफ दर की घोषणा ने तत्काल झटका कम किया है, लेकिन उद्योग के लिए अनिश्चितता की परतें अब भी बरकरार हैं। निर्यातकों को अब अधिक लचीली रणनीति, लागत नियंत्रण और नए बाजारों की तलाश पर ध्यान देना होगा, ताकि वैश्विक व्यापार की इस बदलती बिसात पर अपनी स्थिति मजबूत रखी जा सके।