Meta Pixel

समीर वानखेड़े पर फिर कसेगा शिकंजा? दिल्ली हाईकोर्ट ने CAT का फैसला पलटा, केंद्र को दी बड़ी राहत

Spread the love

आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े की कानूनी लड़ाई एक बार फिर तेज हो गई है। बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की गिरफ्तारी से सुर्खियों में आए वानखेड़े को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय ने अहम मोड़ पर फैसला सुनाया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस याचिका को स्वीकार कर लिया है जिसमें केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई पर लगाई गई रोक को चुनौती दी गई थी। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने CAT के आदेश को निरस्त कर दिया, जिससे अब उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की राह फिर से खुल गई है।

दरअसल, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड ने वानखेड़े के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की थी। यह कदम उनके नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो में सेवा के दौरान वर्ष 2021 के चर्चित कॉर्डेलिया क्रूज ड्रग जब्ती प्रकरण से जुड़े आरोपों के आधार पर उठाया गया था। इस मामले में आर्यन खान की गिरफ्तारी के बाद देशभर में भारी राजनीतिक और कानूनी बहस छिड़ गई थी। इसी दौरान वानखेड़े की कार्यशैली और जांच प्रक्रिया को लेकर कई शिकायतें सामने आईं, जिसके बाद आंतरिक जांच की प्रक्रिया शुरू हुई।

समीर वानखेड़े ने अपने बचाव में यह दलील दी थी कि प्रारंभिक जांच की टिप्पणियों को सीधे औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई का आधार नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विभागीय प्रक्रिया में उचित नियमों का पालन नहीं किया गया और उनके खिलाफ जारी आरोप पत्र मनमाना तथा दुर्भावनापूर्ण है। इन तर्कों से सहमत होते हुए केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण ने जनवरी 2026 में उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।

हालांकि, केंद्र सरकार ने इस निर्णय को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया। सरकार का कहना था कि विभाग को अनुशासनात्मक कार्रवाई करने से रोका जाना उचित नहीं है और मामले की गंभीरता को देखते हुए आगे की प्रक्रिया आवश्यक है। अब हाईकोर्ट ने सरकार की दलीलों को स्वीकार करते हुए CAT के आदेश को रद्द कर दिया है।

इस फैसले के बाद स्पष्ट है कि समीर वानखेड़े के खिलाफ लंबित विभागीय कार्रवाई दोबारा शुरू हो सकती है। यह मामला केवल एक अधिकारी की सेवा संबंधी कार्यवाही तक सीमित नहीं है, बल्कि उस हाई प्रोफाइल ड्रग प्रकरण से भी जुड़ा है जिसने देशभर में व्यापक चर्चा को जन्म दिया था। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि विभागीय जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और वानखेड़े की कानूनी रणनीति क्या रहती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *