27 फरवरी को सर्राफा बाजार में फिर उछाल दिखा। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के मुताबिक 24 कैरेट सोना 10 ग्राम पर ₹1,065 चढ़कर ₹1.59 लाख पहुंच गया, जबकि चांदी ₹7,233 की तेजी के साथ ₹2.61 लाख प्रति किलो हो गई। साल 2026 में अब तक सोना करीब ₹25,892 और चांदी ₹37,480 महंगी हो चुकी है। इससे पहले 29 जनवरी को सोने ने ₹1.76 लाख और चांदी ने ₹3.86 लाख का ऑलटाइम हाई भी छुआ था।
कीमतों में तेजी के पीछे कई फैक्टर काम कर रहे हैं। MCX पर गोल्ड-सिल्वर फ्यूचर्स से अतिरिक्त मार्जिन हटने के बाद ट्रेडिंग सस्ती हुई, जिससे खरीदारी बढ़ी। वैश्विक स्तर पर मिडिल ईस्ट तनाव और रूस-यूक्रेन वार्ता में अनिश्चितता ने सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ाई। अमेरिकी फेड से दर कटौती के संकेत भी सोने के लिए सपोर्टिव माने जा रहे हैं। हालिया गिरावट के बाद निवेशकों ने ‘डिप पर खरीदारी’ का मौका भी भुनाया।
शहर-दर-शहर कीमतें अलग दिखने की वजहें भी साफ हैं—आयात केंद्रों से दूरी के कारण ट्रांसपोर्ट और सिक्योरिटी लागत, स्थानीय मांग-आपूर्ति, ज्वेलरी एसोसिएशन द्वारा तय रेट, और ज्वेलर्स का पुराना स्टॉक किस दाम पर खरीदा गया—ये सभी फैक्टर अंतिम रिटेल प्राइस को प्रभावित करते हैं। दक्षिण भारत में खपत ज्यादा होने से बल्क खरीद के लाभ भी रेट में झलकते हैं।
आगे का अनुमान? निवेश बैंक UBS का आकलन है कि 2026 में वैश्विक केंद्रीय बैंक खरीद 950 टन तक पहुंच सकती है और गोल्ड ETF में निवेश भी मजबूत रह सकता है। डॉलर में कीमतें ऊंची रेंज की ओर बढ़ें तो रुपये के लिहाज से सोना 10 ग्राम पर ₹1.80 लाख तक जा सकता है—बशर्ते वैश्विक संकेतक अनुकूल रहें।
खरीदारी से पहले सावधानी भी जरूरी है। हमेशा BIS हॉलमार्क वाला प्रमाणित सोना लें और उस दिन की दर को विश्वसनीय स्रोतों से क्रॉस-चेक करें; 24K, 22K और 18K के रेट अलग होते हैं। चांदी लेते समय मैग्नेट, आइस, स्मेल और क्लॉथ टेस्ट जैसे आसान तरीकों से प्राथमिक जांच की जा सकती है, हालांकि बड़ी खरीद में प्रमाणित बिल और शुद्धता की पुष्टि अनिवार्य रखें।
तेजी का ट्रेंड जारी है, लेकिन वोलैटिलिटी भी साथ चल रही है। निवेश से पहले अपने लक्ष्य, जोखिम क्षमता और समय-सीमा का आकलन करना समझदारी होगी।