हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार पर दबाव साफ दिखा। बीएसई सेंसेक्स करीब 600 अंक फिसलकर 81,600 के आसपास पहुंच गया, जबकि निफ्टी-50 25,300 के नीचे कारोबार करता दिखा। एडवांस-डिक्लाइन अनुपात भी कमजोरी की ओर इशारा कर रहा था—लगभग 1,370 शेयरों में तेजी रही, जबकि 2,200 से अधिक शेयर गिरावट में रहे।
गिरावट का असर सेक्टोरल इंडेक्स में भी दिखा। बैंकिंग, ऑटो, मेटल, रियल्टी और फार्मा शेयरों में बिकवाली रही। आईटी सेक्टर में लगभग 1.9% तक की मजबूती दिखी, लेकिन यह व्यापक नकारात्मक रुझान को पलटने के लिए पर्याप्त नहीं रही।
दबाव के पीछे कई कारक रहे। एशियाई बाजारों में कमजोरी और वॉल स्ट्रीट पर टेक शेयरों पर दबाव ने जोखिम लेने की क्षमता घटाई। वैश्विक टेक दिग्गजों में गिरावट—खासतौर पर सेमीकंडक्टर स्पेस में—ने निवेशकों की धारणा पर असर डाला।
घरेलू स्तर पर विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली ने मोर्चा और कमजोर किया। पिछले सत्र में एफआईआई ने लगभग ₹3,466 करोड़ के शेयर बेचे, जिससे तरलता और सेंटीमेंट दोनों पर असर पड़ा। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की खरीद ने कुछ संतुलन बनाया, लेकिन प्रभाव सीमित रहा।
भूराजनीतिक मोर्चे पर मध्य पूर्व में अनिश्चितता और अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता के नतीजा-रहित रहने से सतर्कता बढ़ी। इसी बीच रुपया 90.95 प्रति डॉलर के आसपास खुला, जो आयात-निर्भर सेक्टरों के लिए अतिरिक्त दबाव का संकेत है।
अस्थिरता सूचकांक (India VIX) में लगभग 3% की उछाल के साथ 13.44 तक पहुंचना निवेशकों की बढ़ती बेचैनी दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार साइडवेज रेंज में है और मजबूत ट्रिगर के अभाव में चुनिंदा, सतर्क ट्रेडिंग ही रणनीति रह सकती है।
कुल मिलाकर, विदेशी बिकवाली, कमजोर वैश्विक संकेत, भूराजनीतिक तनाव और रुपये की नरमी—इन सभी कारकों के मेल ने बाजार को दबाव में रखा है। आने वाले सत्रों में वैश्विक संकेत और पूंजी प्रवाह की दिशा ही अगला रुख तय करेंगे।