भारत में WhatsApp पर सख्ती की तैयारी, SIM बाइंडिंग से जुड़ेगा अकाउंट; साइबर फ्रॉड पर लगेगी लगाम?

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भारत में डिजिटल सुरक्षा को लेकर सरकार का रुख अब और सख्त होता दिख रहा है। जल्द ही मैसेजिंग ऐप्स, खासकर व्हाट्सऐप के काम करने के तरीके में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय यूजर्स के लिए WhatsApp एक नया ‘SIM बाइंडिंग’ फीचर लागू करने की तैयारी कर रहा है, जिसका मकसद साइबर फ्रॉड को कम करना और फर्जी अकाउंट्स पर रोक लगाना है।

क्या है SIM बाइंडिंग फीचर?

नई व्यवस्था के तहत अगर आपने भारतीय (+91) मोबाइल नंबर से WhatsApp अकाउंट बनाया है, तो ऐप समय-समय पर यह जांच करेगा कि वही रजिस्टर्ड SIM कार्ड आपके फोन में एक्टिव है या नहीं।

अगर SIM कार्ड फोन में मौजूद नहीं है या नंबर मैच नहीं करता है, तो अकाउंट की कुछ सुविधाएं सीमित की जा सकती हैं। हालांकि, पुरानी चैट्स सुरक्षित रहेंगी। यूजर्स अपने मैसेज नहीं खोएंगे, लेकिन नए मैसेज तब तक नहीं मिल सकते जब तक दोबारा वेरिफिकेशन पूरा न हो जाए।

क्यों लागू हो रहा है यह नियम?

यह अपडेट टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी रूल्स 2024 के तहत डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन्स (DoT) के निर्देशों से जुड़ा है। सरकार का मानना है कि एक्टिव SIM वेरिफिकेशन से फर्जी नंबरों, बॉट अकाउंट्स और ऑनलाइन स्कैम पर काबू पाया जा सकता है।

अक्सर साइबर अपराधी चोरी या फर्जी दस्तावेजों से लिए गए SIM कार्ड के जरिए अकाउंट बनाकर धोखाधड़ी करते हैं। ऐसे में यह कदम अकाउंट की वास्तविक पहचान सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

वेब और डेस्कटॉप यूजर्स के लिए भी बदलाव

नए दिशानिर्देशों के अनुसार, WhatsApp Web और डेस्कटॉप वर्जन को हर छह घंटे में ऑटो-लॉगआउट करना होगा। यूजर्स को QR कोड स्कैन कर दोबारा लॉगइन करना पड़ेगा। इससे अनधिकृत एक्सेस की संभावना कम होगी।

क्या हैं चिंताएं?

कुछ डिजिटल राइट्स समूहों ने इस नियम पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर किसी का SIM खराब हो जाए, फोन रिपेयर में हो या यूजर विदेश में हो, तो बार-बार वेरिफिकेशन परेशानी पैदा कर सकता है।

फिलहाल यह फीचर डेवलपमेंट स्टेज में है और आधिकारिक रोलआउट की तारीख सामने नहीं आई है। लेकिन संकेत साफ हैं—भारत में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सुरक्षा और पहचान सत्यापन को लेकर नियम अब और कड़े होने वाले हैं।

यह बदलाव जहां साइबर फ्रॉड पर लगाम लगाने की दिशा में अहम कदम हो सकता है, वहीं यूजर्स के लिए सुविधा और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी होगा।

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