होर्मुज संकट से तेल में उबाल, ब्रेंट 79 डॉलर पार; वैश्विक बाजारों में बिकवाली तेज

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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य पर आपूर्ति जोखिम की आशंकाओं ने कच्चे तेल के बाजार में फिर से उथल-पुथल मचा दी है। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई दोनों में 2% से अधिक की तेजी दर्ज की गई। हालांकि सोमवार की तेज छलांग के बाद कुछ ठहराव दिखा, जब अमेरिका ने घरेलू ऊर्जा कीमतों को काबू में रखने के संकेत दिए।

कितनी बढ़ीं कीमतें?

सुबह 04:00 GMT तक ब्रेंट क्रूड वायदा 1.70 डॉलर (करीब 2.2%) उछलकर 79.44 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। एक दिन पहले यह 82.37 डॉलर तक गया था—जनवरी 2025 के बाद का उच्चतम स्तर—और दिन के अंत में 6.7% की बढ़त के साथ बंद हुआ।

अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी 1.17 डॉलर (1.6%) चढ़कर 72.40 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। पिछले सत्र में यह जून 2025 के बाद के उच्चतम स्तर तक गया था और 6.3% की बढ़त के साथ बंद हुआ।

क्यों अहम है होर्मुज?

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की धुरी है। दुनिया की लगभग 20% पेट्रोलियम तरल आपूर्ति और करीब 20% एलएनजी शिपमेंट इसी मार्ग से गुजरती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की बाधा वैश्विक कीमतों को झकझोर सकती है। विश्लेषकों का कहना है कि क्षेत्र में ऊर्जा अवसंरचना को निशाना बनाए जाने की आशंका बनी हुई है, जिससे आपूर्ति जोखिम बढ़ा है।

आईजी मार्केट के विश्लेषक टोनी साइकामोर ने संकेत दिया कि हालात में फिलहाल नरमी के संकेत नहीं हैं। संघर्ष जितना लंबा खिंचेगा, कीमतों में अस्थिरता का जोखिम उतना बढ़ेगा। Morgan Stanley ने भी चेताया है कि यदि पूर्ण पैमाने पर संघर्ष हुआ और होर्मुज से तेल प्रवाह बाधित रहा, तो ब्रेंट 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है।

भारत के लिए क्यों चिंता?

तेल आयात पर निर्भर भारत के लिए 100 डॉलर से ऊपर टिकाऊ कीमतें आयात बिल बढ़ा सकती हैं, महंगाई पर दबाव डाल सकती हैं और राजकोषीय संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि ट्रेजरी और ऊर्जा विभाग कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए कदमों की घोषणा कर सकते हैं। इससे सोमवार की घबराहट कुछ कम हुई, लेकिन बाजार की नजर अब भी पश्चिम एशिया और होर्मुज की गतिविधियों पर टिकी है।

वैश्विक बाजारों में क्या हाल?

तेल में उछाल और भू-राजनीतिक जोखिम के बीच एशियाई बाजारों में बिकवाली दिखी। जापान का निक्केई 225 करीब 1.71% गिरकर 57,065 पर आ गया। हांगकांग का हैंग सेंग 0.24% फिसलकर 25,985 पर रहा। ताइवान का सूचकांक 0.36% और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 2.42% नीचे रहा, जबकि सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स 0.94% बढ़ा।

अमेरिकी बाजारों में सोमवार को मिला-जुला रुख रहा—डाउ जोन्स 0.15% गिरा, S&P 500 में 0.04% की मामूली बढ़त रही और नैस्डैक 0.41% चढ़ा।

कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज पर अनिश्चितता ने ऊर्जा बाजारों को फिर से अस्थिर कर दिया है। कीमतों की दिशा अब क्षेत्रीय घटनाक्रम और आपूर्ति की वास्तविक स्थिति पर निर्भर करेगी।

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