पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत ने समुद्री सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। Directorate General of Shipping (डीजी शिपिंग) ने फारस की खाड़ी और आसपास के संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी कर जहाज संचालकों और नाविकों को उच्च सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।
महानिदेशालय ने स्पष्ट किया है कि वह फारस की खाड़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी समेत आसपास के समुद्री क्षेत्रों में तेजी से बदलती सुरक्षा स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। इन इलाकों को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
क्या दिए गए हैं निर्देश?
एडवाइजरी में जहाज मालिकों, प्रबंधन कंपनियों और कप्तानों को प्रत्येक यात्रा से पहले मार्ग-विशेष जोखिम आकलन (Route-Specific Risk Assessment) करने को कहा गया है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि, असामान्य मूवमेंट या सुरक्षा खतरे की स्थिति में तुरंत संबंधित प्राधिकरणों को सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं।
साथ ही समुद्री सुरक्षा प्रोटोकॉल और अंतरराष्ट्रीय दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करने पर जोर दिया गया है, ताकि भारतीय नाविकों और जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
चार घटनाएं, तीन भारतीयों की मौत
डीजी शिपिंग के अनुसार, अब तक विदेशी ध्वज वाले जहाजों पर हुई चार घटनाओं की पुष्टि हुई है, जिनमें भारतीय नाविक प्रभावित हुए हैं। इन घटनाओं में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है, जबकि एक गंभीर रूप से घायल है।
हालांकि ये घटनाएं भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर नहीं हुईं, लेकिन भारतीय क्रू मेंबर्स के शामिल होने के कारण मामला गंभीर माना जा रहा है। महानिदेशालय ने स्थिति को संवेदनशील बताते हुए सभी हितधारकों से अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की है।
वैश्विक शिपिंग पर असर
पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर पहले से ही वैश्विक शिपिंग और तेल आपूर्ति पर दिख रहा है। कई जहाज वैकल्पिक मार्गों पर विचार कर रहे हैं, जबकि बीमा प्रीमियम और आपातकालीन अधिभार में भी वृद्धि देखी जा रही है।
भारत जैसे ऊर्जा आयातक देश के लिए इन समुद्री मार्गों की सुरक्षा बेहद अहम है। ऐसे में डीजी शिपिंग की एडवाइजरी को एहतियाती कदम के रूप में देखा जा रहा है।
फिलहाल समुद्री सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं और आवश्यकता पड़ने पर आगे के दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।