दंतेवाड़ा-बीजापुर बॉर्डर पर मुठभेड़, 5 लाख का इनामी नक्सली राजेश पुनेम ढेर; इंसास और SLR समेत हथियार बरामद

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छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाके में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। Dantewada और Bijapur जिले की सीमा पर पुलिस और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में एक इनामी नक्सली मारा गया है। सुरक्षा बलों ने मौके से हथियारों और नक्सली सामग्री का बड़ा जखीरा भी बरामद किया है।

पुलिस के अनुसार मारे गए नक्सली की पहचान भैरमगढ़ एरिया कमेटी के एसीएम राजेश पुनेम के रूप में हुई है, जिस पर 5 लाख रुपये का इनाम घोषित था। मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बलों ने घटनास्थल से SLR रायफल, इंसास रायफल, पिस्टल, वॉकी-टॉकी और बड़ी मात्रा में जिंदा तथा खाली कारतूस बरामद किए हैं।

जानकारी के मुताबिक 3 मार्च को पुलिस को सूचना मिली थी कि Gidam थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गुमलनार, गिरसापारा और नेलगोड़ा गांवों के बीच जंगल और पहाड़ी इलाके में नक्सलियों ने हथियार और अन्य सामग्री छिपाकर रखी है। इस सूचना के आधार पर Rahul Kumar Uike के नेतृत्व में डीआरजी और बस्तर फाइटर्स की संयुक्त टीम को सर्चिंग अभियान के लिए रवाना किया गया।

दोपहर करीब साढ़े बारह बजे पुलिस टीम संदिग्ध इलाके की ओर बढ़ते हुए जंगल और पहाड़ी क्षेत्र में सर्चिंग और घेराबंदी कर रही थी। इसी दौरान रात करीब साढ़े आठ से नौ बजे के बीच पहले से घात लगाकर बैठे भैरमगढ़ एरिया कमेटी के 8 से 10 सशस्त्र नक्सलियों ने अचानक पुलिस पार्टी पर हमला कर दिया।

नक्सलियों की ओर से की गई फायरिंग के बाद सुरक्षा बलों ने भी मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई शुरू की। दोनों तरफ से काफी देर तक गोलीबारी चलती रही। जवानों की जवाबी फायरिंग के बाद नक्सली घने जंगल और अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से भाग निकले।

मुठभेड़ के बाद जब पुलिस ने इलाके में सर्चिंग की, तो वहां एक पुरुष नक्सली का शव बरामद हुआ। बाद में उसकी पहचान भैरमगढ़ एरिया कमेटी के एसीएम राजेश पुनेम के रूप में की गई, जो लंबे समय से सुरक्षा बलों की सूची में वांछित था और उस पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था।

पुलिस को शव के पास से कई आधुनिक हथियार और नक्सली सामग्री भी मिली है। इनमें SLR रायफल, इंसास रायफल, पिस्टल, वॉकी-टॉकी, मैगजीन और बड़ी संख्या में जिंदा व खाली कारतूस शामिल हैं।

सुरक्षा बलों का कहना है कि इलाके में अभी भी सर्चिंग अभियान जारी है, क्योंकि संभावना है कि मुठभेड़ के दौरान अन्य नक्सली भी आसपास के जंगलों में छिपे हो सकते हैं।

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