ईरान-अमेरिका जंग में बड़ा हमला, श्रीलंका के पास ईरानी युद्धपोत ‘IRIS देना’ डूबा; 87 नाविकों की मौत

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मध्य पूर्व में जारी भीषण संघर्ष अब और खतरनाक दौर में पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के बीच समुद्र में भी बड़ा हमला सामने आया है। खबरों के मुताबिक अमेरिका ने हिंद महासागर में ईरान के युद्धपोत को निशाना बनाते हुए बड़ा सैन्य ऑपरेशन अंजाम दिया, जिसमें कई नाविकों की मौत हो गई।

बताया जा रहा है कि ईरान का युद्धपोत IRIS Dena श्रीलंका के पास समुद्री क्षेत्र में मौजूद था, तभी अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो हमला कर उसे डुबो दिया। इस हमले में करीब 87 ईरानी नौसैनिकों के मारे जाने की जानकारी सामने आई है। यह जहाज ईरानी नौसेना का एक महत्वपूर्ण युद्धपोत माना जाता था।

रिपोर्टों के अनुसार यह युद्धपोत हाल ही में भारत के Visakhapatnam में आयोजित International Fleet Review 2026 में भाग लेकर लौट रहा था। इसी दौरान हिंद महासागर में अमेरिकी नौसेना ने इसे निशाना बनाया।

इस कार्रवाई की पुष्टि अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने की है। उनके मुताबिक अमेरिकी पनडुब्बी ने समुद्र में इस जहाज को टॉरपीडो से निशाना बनाया, जिसके बाद जहाज समुद्र में डूब गया।

मौजूदा संघर्ष में यह दावा भी किया जा रहा है कि अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में अब तक ईरान के करीब 17 युद्धपोत नष्ट हो चुके हैं। इस बीच युद्ध के 100 घंटे पूरे होने के बाद सामने आए आंकड़ों के अनुसार दोनों पक्षों में मिलाकर एक हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

दूसरी ओर Iran ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए मिडिल ईस्ट के कई हिस्सों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। ईरान ने दावा किया है कि उसने नौ देशों में मौजूद लगभग 14 अमेरिकी सैन्य बेस पर मिसाइल हमले किए हैं।

ईरान ने चेतावनी भी दी है कि अगर अमेरिका और Israel ने उसकी सत्ता को अस्थिर करने की कोशिश की तो वह इजरायल के परमाणु ठिकानों को भी निशाना बना सकता है। ईरानी मीडिया के अनुसार देश की सेना इजरायल के प्रसिद्ध Dimona Nuclear Center पर हमले की तैयारी कर चुकी है।

इसी बीच ईरान के भीतर हुए नुकसान की नई सैटेलाइट तस्वीरें भी सामने आई हैं। इनमें उत्तर ईरान के Kermanshah क्षेत्र में स्थित मिसाइल बेस को भारी नुकसान हुआ दिखाई दे रहा है। तस्वीरों में कई इमारतें पूरी तरह तबाह दिख रही हैं और जमीन के नीचे बने बंकरों के प्रवेश द्वार भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त नजर आ रहे हैं।

जंग की आग अब पड़ोसी देशों तक भी फैलती दिख रही है। रिपोर्टों के मुताबिक इजरायली सेना ने उत्तरी लेबनान में स्थित फिलिस्तीनी शरणार्थी कैंप Beddawi Refugee Camp पर भी हमला किया है। इस घटना के बाद राजधानी Beirut में दहशत का माहौल बन गया और लोगों में संभावित हमलों को लेकर भय फैल गया।

अमेरिकी प्रशासन ने भी इस संघर्ष को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। व्हाइट हाउस के सूत्रों के अनुसार अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर अमेरिकी सैनिकों को खतरा हुआ तो ईरान की सैन्य क्षमता को पूरी तरह खत्म करने के लिए कठोर कदम उठाए जाएंगे।

बताया जा रहा है कि इस मिशन के लिए अमेरिका ने बड़ी सैन्य तैयारी कर रखी है। करीब 50 हजार सैनिकों के साथ 200 से ज्यादा फाइटर जेट और बी-52 जैसे शक्तिशाली बमवर्षक विमानों को तैनात किया गया है। साथ ही पहली बार आधुनिक प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल और कामिकेज ड्रोन का इस्तेमाल कर ईरान के कमांड सेंटरों को निशाना बनाया गया है।

इस तरह मिडिल ईस्ट का यह संघर्ष अब तेजी से व्यापक युद्ध की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

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