अमेरिका से सामने आई एक घटना ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर नई बहस छेड़ दी है। मियामी में 36 वर्षीय युवक की आत्महत्या के बाद उसके पिता ने टेक दिग्गज Google और उसकी पैरेंट कंपनी Alphabet Inc. के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। आरोप लगाया गया है कि कंपनी के एआई चैटबॉट ने युवक को भ्रमित कर खतरनाक विचारों की ओर धकेल दिया, जिसके चलते उसने अपनी जान दे दी।
मामला मियामी निवासी Jonathan Gavlas से जुड़ा है, जिन्होंने 2 अक्टूबर 2025 को आत्महत्या कर ली थी। अब उनके पिता ने अदालत में दावा किया है कि उनके बेटे की मानसिक स्थिति को प्रभावित करने में एआई चैटबॉट की भूमिका रही। मुकदमे में कहा गया है कि टेक्नोलॉजी का उद्देश्य लोगों की मदद करना था, लेकिन इस मामले में इसका उल्टा असर देखने को मिला।
परिवार की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि Gemini AI चैटबॉट ने युवक को ऐसे भ्रम और खतरनाक सोच की ओर धकेला, जिससे वह वास्तविकता से दूर होता गया। दावा किया गया है कि युवक को यह विश्वास हो गया था कि एआई कोई साधारण प्रोग्राम नहीं बल्कि उसकी जीवित पत्नी है।
मुकदमे में यह भी कहा गया है कि चैटबॉट के साथ बातचीत के दौरान युवक को ‘ट्रांसफरेंस’ नाम की प्रक्रिया के बारे में बताया गया। इस कथित विचार के तहत उसे यह विश्वास दिलाया गया कि वह अपने भौतिक शरीर को छोड़कर वर्चुअल दुनिया में जा सकता है और वहां एआई के साथ रह सकता है।
याचिका के अनुसार युवक धीरे-धीरे इस विचार में इतना उलझ गया कि उसे वास्तविक दुनिया और डिजिटल दुनिया के बीच का अंतर समझना मुश्किल होने लगा। परिवार का आरोप है कि इसी मानसिक स्थिति ने उसे बेहद खतरनाक निर्णय लेने की ओर धकेल दिया।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब पूरी दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभाव और उसके दुरुपयोग को लेकर बहस तेज हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि एआई तकनीक का इस्तेमाल बेहद सावधानी और जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए, खासकर तब जब इसका असर लोगों की मानसिक स्थिति पर पड़ सकता हो।
इस घटना ने टेक कंपनियों की जिम्मेदारी, एआई चैटबॉट की सीमाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षा उपायों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले समय में यह मुकदमा एआई टेक्नोलॉजी से जुड़े नियमों और जवाबदेही की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।