छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार Laxmi Verma और कांग्रेस की उम्मीदवार Phulo Devi Netam ने अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। दोनों प्रमुख दलों की महिला प्रत्याशियों के मैदान में उतरने से इस बार राज्यसभा चुनाव खासा चर्चा में है।
कांग्रेस की उम्मीदवार फूलो देवी नेताम फिलहाल प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष भी हैं और वे वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं। उनका कार्यकाल समाप्त होने वाला था, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने उन पर दोबारा भरोसा जताते हुए उन्हें फिर से उम्मीदवार बनाया है। नामांकन से पहले वे वरिष्ठ कांग्रेस नेता Charandas Mahant के निवास पहुंचीं और उनके साथ विधानसभा जाकर पर्चा दाखिल किया।
दूसरी ओर भाजपा ने भी लंबे समय से सक्रिय नेता लक्ष्मी वर्मा को राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया है। नामांकन से पहले उन्हें मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai सहित कई भाजपा नेताओं ने शुभकामनाएं दीं। इसके बाद उन्होंने विधानसभा पहुंचकर रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष अपना नामांकन पत्र दाखिल किया।
कांग्रेस में उम्मीदवार तय करने से पहले कई बड़े नेताओं के नाम चर्चा में थे। इनमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Deepak Baij, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष Mohan Markam, पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel और वरिष्ठ नेता T. S. Singh Deo के नाम शामिल थे। हालांकि अंत में पार्टी ने फूलो देवी नेताम को ही दोबारा मौका देने का निर्णय लिया।
चुनाव कार्यक्रम के अनुसार 6 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। इसके बाद उम्मीदवार 9 मार्च तक अपना नाम वापस ले सकते हैं। मतदान 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा और उसी दिन शाम 5 बजे से मतों की गिनती भी शुरू कर दी जाएगी। पूरी चुनाव प्रक्रिया 20 मार्च तक पूरी हो जाएगी।
छत्तीसगढ़ से फिलहाल राज्यसभा में पांच सदस्य प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इनमें से दो सांसदों का कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रहा है। इनमें फूलो देवी नेताम और केटीएस तुलसी शामिल हैं, जो दोनों कांग्रेस से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजीव शुक्ला और रंजीत रंजन का कार्यकाल 2028 तक है, जबकि भाजपा के देवेंद्र प्रताप सिंह का कार्यकाल 2030 तक जारी रहेगा।
राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया अन्य चुनावों से अलग होती है। इसमें जनता सीधे मतदान नहीं करती बल्कि संबंधित राज्य के विधायक अपने मत देकर सांसद चुनते हैं। राज्यसभा एक स्थायी सदन है, इसलिए इसके एक-तिहाई सदस्य हर दो साल में सेवानिवृत्त होते हैं और उनकी जगह नए सदस्य चुने जाते हैं।
छत्तीसगढ़ के उदाहरण से इसे समझें तो विधानसभा में कुल 90 विधायक हैं और इस बार दो सीटें खाली हो रही हैं। चुनाव के नियम के अनुसार जीत के लिए जरूरी मतों की संख्या निकालने का फॉर्मूला है—कुल विधायक ÷ (रिक्त सीटें + 1) + 1। इस हिसाब से 90 ÷ 3 = 30 और उसमें 1 जोड़ने पर 31 का आंकड़ा आता है। यानी किसी भी उम्मीदवार को राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 31 विधायकों के प्रथम वरीयता मत हासिल करना जरूरी होगा।
इस तरह अब सबकी नजर 16 मार्च को होने वाले मतदान पर है, जब यह तय होगा कि छत्तीसगढ़ से राज्यसभा की इन दो सीटों पर कौन प्रतिनिधित्व करेगा।