आज के समय में महंगे पेट्रोल और डीजल के बीच CNG कारें लोगों के लिए किफायती विकल्प बन चुकी हैं। लेकिन कई कार मालिकों की यह शिकायत रहती है कि उनकी CNG गाड़ी उम्मीद के मुताबिक माइलेज नहीं दे रही। जबकि सच यह है कि कई बार छोटी-छोटी तकनीकी वजहों या लापरवाही के कारण गाड़ी की फ्यूल एफिशिएंसी कम हो जाती है। अच्छी बात यह है कि अगर समय रहते इन बातों पर ध्यान दिया जाए तो माइलेज को आसानी से बेहतर किया जा सकता है।
सबसे पहले कार के टायर प्रेशर पर ध्यान देना बेहद जरूरी होता है। अगर टायरों में हवा कम होती है तो गाड़ी को चलाने के लिए इंजन को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे ईंधन की खपत बढ़ जाती है और माइलेज कम हो जाता है। इसलिए हमेशा कंपनी द्वारा बताए गए सही टायर प्रेशर को बनाए रखना चाहिए। इसके अलावा अगर टायर ज्यादा घिस चुके हों या उनमें हल्का पंक्चर हो तो भी कार भारी महसूस होती है और गैस ज्यादा खर्च होने लगती है।
CNG कार में क्लच सिस्टम भी माइलेज पर काफी असर डालता है। अगर क्लच ढीला हो गया है या सही तरीके से काम नहीं कर रहा है तो इंजन को गाड़ी को आगे बढ़ाने में अतिरिक्त ताकत लगानी पड़ती है। ऐसी स्थिति में गैस की खपत बढ़ जाती है और माइलेज घटने लगता है। इसलिए अगर बाकी सब ठीक होने के बावजूद माइलेज कम मिल रहा हो तो क्लच की जांच कराना जरूरी हो जाता है।
एयर फिल्टर भी माइलेज से जुड़ा एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। समय के साथ इसमें धूल और गंदगी जमा हो जाती है, जिससे इंजन को पर्याप्त मात्रा में हवा नहीं मिल पाती। जब इंजन को सही एयर फ्लो नहीं मिलता तो वह ज्यादा ईंधन खर्च करता है। इसलिए समय-समय पर एयर फिल्टर की सफाई कराना या जरूरत पड़ने पर उसे बदलवाना फायदेमंद होता है।
इसके अलावा कार की नियमित सर्विसिंग भी बेहद जरूरी है। कई लोग तब तक सर्विस नहीं कराते जब तक गाड़ी में बड़ी समस्या सामने न आ जाए। लेकिन अगर समय पर सर्विस कराई जाए तो छोटी-छोटी तकनीकी खराबियां पहले ही ठीक हो जाती हैं। इससे इंजन की कार्यक्षमता बनी रहती है और गाड़ी बेहतर माइलेज देने लगती है।
अगर आपकी CNG कार भी कम माइलेज दे रही है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। बस थोड़ी सावधानी और नियमित मेंटेनेंस के जरिए आप अपनी गाड़ी की फ्यूल एफिशिएंसी को फिर से बेहतर बना सकते हैं और ड्राइविंग को ज्यादा किफायती बना सकते हैं।