पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। Iran–Israel conflict के बढ़ते प्रभाव को लेकर ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं, जिससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर बड़ा दबाव पड़ सकता है।
Saad Al-Kaabi ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया से बातचीत में कहा कि खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा उत्पादकों को मजबूरी में उत्पादन और आपूर्ति रोकनी पड़ सकती है। अगर ऐसा हुआ तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है और कई कंपनियां ‘फोर्स मेज्योर’ घोषित कर सकती हैं। फोर्स मेज्योर का मतलब होता है कि युद्ध या आपदा जैसी असाधारण परिस्थितियों के कारण कंपनियां अपने तय अनुबंधों के अनुसार आपूर्ति नहीं कर पाएंगी।
इस बीच ईरानी ड्रोन हमले के बाद Ras Laffan LNG Terminal में उत्पादन प्रभावित हुआ है। यह दुनिया के सबसे बड़े तरलीकृत प्राकृतिक गैस संयंत्रों में से एक माना जाता है। हमले के बाद कतर ने यहां ‘फोर्स मेज्योर’ घोषित कर दिया है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है। ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार यह अभी स्पष्ट नहीं है कि संयंत्र को पूरी तरह सामान्य होने में कितना समय लगेगा।
हालांकि युद्ध अगर तुरंत भी रुक जाए तो भी निर्यात सामान्य होने में कई सप्ताह या महीनों का समय लग सकता है। जहाजों की आवाजाही बाधित होने और लॉजिस्टिक व्यवस्था प्रभावित होने के कारण सप्लाई चेन पहले से ही दबाव में है। कतर के पास 128 एलएनजी जहाजों का बड़ा बेड़ा है, लेकिन मौजूदा हालात में उनमें से केवल छह या सात जहाज ही कार्गो लोड करने की स्थिति में हैं।
ऊर्जा बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही का बाधित होना है। यह समुद्री मार्ग दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अगर इस रास्ते पर अगले दो से तीन हफ्तों तक रुकावट बनी रहती है तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि ऐसी स्थिति में प्राकृतिक गैस की कीमतें भी तेजी से बढ़ सकती हैं और यह 40 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू तक पहुंच सकती हैं, जो युद्ध से पहले के स्तर से कई गुना अधिक है।
ऊर्जा आपूर्ति में रुकावट का असर केवल तेल और गैस तक सीमित नहीं रहेगा। खाड़ी देशों से पेट्रोकेमिकल और उर्वरक उद्योग के लिए जरूरी कच्चा माल भी बड़ी मात्रा में दुनिया भर में भेजा जाता है। यदि इनका निर्यात प्रभावित होता है तो कई उद्योगों की उत्पादन श्रृंखला रुक सकती है और वैश्विक सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ सकता है।
कतर के ऊर्जा मंत्री ने चेतावनी दी है कि यदि संघर्ष कुछ और हफ्तों तक जारी रहा तो वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर पर भी असर पड़ सकता है। ऊर्जा की कीमतें बढ़ने से कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा और महंगाई में भी तेज उछाल देखने को मिल सकता है।
सुरक्षा कारणों से ऊर्जा कंपनियों ने एहतियातन अपने संयंत्रों से करीब 9 हजार कर्मचारियों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया है। जब तक सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह खतरा टलने की पुष्टि नहीं करतीं, तब तक उत्पादन सामान्य स्तर पर शुरू करना संभव नहीं माना जा रहा है।