‘बिग बॉस सीजन 19’ की रनर-अप और अभिनेत्री फरहाना भट्ट इन दिनों सोशल मीडिया पर जबरदस्त विवादों में घिरी हुई हैं। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन पर दुख जताने के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। लगातार हो रही आलोचना के बीच अब फरहाना भट्ट ने सामने आकर पूरे मामले पर सफाई दी है और कहा है कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
फरहाना भट्ट ने साफ कहा कि उन्होंने कभी भी भारत के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया है और न ही वे कभी अपने देश के खिलाफ जाएंगी। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को जज करने से पहले उसकी बात को पूरी तरह समझना चाहिए। फरहाना के मुताबिक कई लोगों ने बिना पूरी बात जाने ही उन्हें निशाना बनाना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी सांस चलेगी, वे अपने देश के खिलाफ कभी नहीं जाएंगी। अगर किसी के पास उनके देशविरोधी बयान का कोई भी प्रमाण है तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
दरअसल विवाद की शुरुआत तब हुई जब फरहाना भट्ट ने मीडिया से बातचीत के दौरान ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के निधन पर दुख व्यक्त किया था। उस दौरान उन्होंने कहा था कि खामेनेई ऐसी शख्सियत थे जिन्हें कई लोग कभी भूल नहीं पाएंगे और बहुत से लोगों के लिए वे मसीहा की तरह थे। फरहाना ने यह भी कहा था कि इस खबर से कई लोग सदमे में थे और वह खुद भी इस खबर से काफी भावुक हो गई थीं। उन्होंने बताया था कि सेहरी के बाद वह पूरी रात सो नहीं पाईं और इस घटना ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया।
फरहाना के इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कई लोगों ने उनके बयान की आलोचना की और उन्हें जमकर ट्रोल किया। कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि एक भारतीय कलाकार को किसी विदेशी नेता की मौत पर इस तरह सार्वजनिक रूप से दुख जताने की जरूरत क्यों पड़ी। वहीं कुछ लोगों ने इसे उनकी निजी राय बताते हुए उनका समर्थन भी किया।
ट्रोलिंग बढ़ने के बाद फरहाना भट्ट ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि लोगों की सोच और विचार अलग-अलग हो सकते हैं और वह इस विविधता का सम्मान करती हैं। उनके मुताबिक किसी मुद्दे पर राय रखने का मतलब यह नहीं होता कि वह अपने देश के खिलाफ हैं।
इस पूरे विवाद में टीवी प्रोड्यूसर और अभिनेत्री हिना खान के पति रॉकी जायसवाल ने भी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखते हुए इस बयान पर नाराजगी जताई। रॉकी जायसवाल ने कहा कि किसी व्यक्ति के लिए दुख जताना उसकी निजी भावना हो सकती है, लेकिन जब इसे सार्वजनिक मंच पर व्यक्त किया जाता है तो स्वाभाविक रूप से लोग सवाल भी करते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि कई बार लोग विदेशी नेताओं या घटनाओं के लिए संवेदना जताते हैं, लेकिन भारतीय सैनिकों या देश में हुए हमलों के पीड़ितों के लिए उतना दर्द दिखाई नहीं देता। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस और तेज हो गई।
फिलहाल फरहाना भट्ट ने साफ कर दिया है कि उनके बयान का मकसद किसी तरह की राजनीतिक टिप्पणी करना नहीं था। उनका कहना है कि उन्होंने जो कहा वह एक मानवीय प्रतिक्रिया थी, लेकिन इसे गलत तरीके से समझ लिया गया। इस पूरे विवाद के बीच यह मुद्दा सोशल मीडिया पर चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है और लोग अपने-अपने नजरिए से इस पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं।