छत्तीसगढ़ में ‘सौर सुजला योजना’ होगी बंद, अब पीएम कुसुम योजना के तहत किसानों को मिलेंगे सोलर पंप

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छत्तीसगढ़ में किसानों के लिए शुरू की गई सौर सुजला योजना अब बंद होने जा रही है। वर्ष 2016 में तत्कालीन भाजपा सरकार के दौरान शुरू की गई इस योजना के माध्यम से किसानों को खेतों में सोलर पंप उपलब्ध कराए जाते थे। अब राज्य सरकार इस योजना को समाप्त कर केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत किसानों को सोलर कृषि पंप उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है।

इस संबंध में छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) ने प्रदेश सरकार के माध्यम से केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव में नए सत्र के दौरान राज्य के किसानों के खेतों में 25 हजार सोलर पंप लगाने की योजना शामिल है। केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद अप्रैल से नए सत्र में इन पंपों को लगाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

प्रदेश में अब तक सौर सुजला योजना के तहत करीब एक लाख साठ हजार सोलर पंप लगाए जा चुके हैं। हालांकि योजना के अंतिम वर्ष में इसे बंद किए जाने के कारण इस बार केवल लगभग सात हजार पंप ही लगाए जा सकेंगे। वहीं इस समय क्रेडा के पास करीब 40 हजार किसानों के आवेदन लंबित पड़े हुए हैं। इन सभी आवेदनों पर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद ही लिया जाएगा।

छत्तीसगढ़ में खेती के लिए किसान आमतौर पर बिजली से चलने वाले कृषि पंपों का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन प्रदेश के कई ऐसे ग्रामीण और दूरस्थ इलाके भी हैं जहां बिजली की सुविधा उपलब्ध नहीं है या फिर खेतों तक ट्रांसफार्मर और बिजली के खंभे नहीं पहुंच पाए हैं। ऐसे क्षेत्रों के किसानों को राहत देने के लिए लगभग दस वर्ष पहले रमन सिंह सरकार के कार्यकाल में सौर सुजला योजना शुरू की गई थी।

राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर 1 नवंबर 2016 को इस योजना की शुरुआत की गई थी। इसके तहत किसानों को सब्सिडी के साथ सोलर कृषि पंप उपलब्ध कराए जाते थे, जिससे बिजली की समस्या वाले क्षेत्रों में भी किसान आसानी से सिंचाई कर सकें। योजना के शुरुआती वर्षों में बड़ी संख्या में किसानों के खेतों में सोलर पंप लगाए गए थे।

अब राज्य में सोलर पंप की सुविधा केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत दी जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार ने 25 हजार सोलर कृषि पंप लगाने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा है। मंजूरी मिलने के बाद इस योजना के तहत किसानों को सब्सिडी के साथ सोलर पंप उपलब्ध कराए जाएंगे। हालांकि अभी यह तय नहीं हुआ है कि किसानों को इस योजना में कितनी सब्सिडी मिलेगी।

पहले सौर सुजला योजना के तहत किसानों को बेहद कम कीमत में पंप उपलब्ध हो जाते थे। कई मामलों में किसानों को केवल 10 से 20 हजार रुपये का ही भुगतान करना पड़ता था। वहीं वर्तमान समय में सोलर पंप लगाने की लागत बाजार में कम हुई है, लेकिन फिर भी इसकी कीमत अधिक है। फिलहाल तीन हॉर्स पावर (एचपी) के सोलर पंप की लागत करीब ढाई लाख रुपये और पांच एचपी के पंप की लागत लगभग तीन लाख दस हजार रुपये बताई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया के बाद इनकी कीमत और कम हो सकती है।

क्रेडा के अध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी ने बताया कि प्रदेश में प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत 25 हजार सोलर कृषि पंप लगाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद नए सत्र से किसानों के खेतों में सोलर पंप लगाने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

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