एआई तकनीक से लैस स्मार्ट गैजेट्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसी बीच स्मार्ट ग्लासेज को लेकर एक बड़ा प्राइवेसी विवाद सामने आया है। सोशल मीडिया और टेक कंपनी Meta Platforms पर आरोप लगाया गया है कि उसके एआई स्मार्ट ग्लासेज से रिकॉर्ड हुए लोगों के बेहद निजी वीडियो थर्ड-पार्टी कर्मचारियों द्वारा देखे गए। इस खुलासे के बाद यूजर्स की निजता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और अमेरिका में कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी शुरू हो गई है।
दरअसल यह विवाद उस समय सामने आया जब एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया कि स्मार्ट ग्लासेज से रिकॉर्ड किए गए फोटो और वीडियो की समीक्षा केन्या स्थित एक थर्ड-पार्टी कंपनी के कर्मचारी कर रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार इन फुटेज में कई बेहद निजी पल भी शामिल थे, जिनमें बाथरूम या निजी जगहों के दृश्य और संवेदनशील स्थितियों के वीडियो तक मौजूद थे। इससे यह चिंता बढ़ गई कि एआई डिवाइस के जरिए रिकॉर्ड होने वाला डेटा वास्तव में कितना सुरक्षित है।
कंपनी का कहना है कि कर्मचारियों को दिखाई जाने वाली सामग्री में लोगों की पहचान छिपाने के लिए चेहरों को धुंधला कर दिया जाता है। लेकिन रिपोर्ट में दावा किया गया कि कई बार यह ब्लरिंग सिस्टम ठीक तरह से काम नहीं करता और इससे पहचान उजागर होने की आशंका बनी रहती है। इस खुलासे के बाद डेटा सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ गई है और नियामक एजेंसियों ने मामले पर नजर रखनी शुरू कर दी है।
इसी बीच अमेरिका में दो उपभोक्ताओं ने कंपनी पर मुकदमा दायर किया है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मेटा ने अपने स्मार्ट ग्लासेज का प्रचार करते समय यूजर्स को यह भरोसा दिलाया था कि उनकी प्राइवेसी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी। विज्ञापनों में ऐसे दावे किए गए थे कि यह डिवाइस “प्राइवेसी के लिए डिजाइन” किया गया है और इसका पूरा नियंत्रण यूजर के हाथ में है। लेकिन आरोप है कि कंपनी ने यह स्पष्ट रूप से नहीं बताया कि एआई फीचर इस्तेमाल करने पर वीडियो और फोटो इंसानों द्वारा भी देखे जा सकते हैं।
मेटा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि कंपनी यूजर्स का डेटा बिना अनुमति के इस्तेमाल नहीं करती। कंपनी के अनुसार स्मार्ट ग्लासेज से रिकॉर्ड की गई फोटो और वीडियो पहले यूजर के फोन में ही सेव रहती हैं और जब तक उपयोगकर्ता उन्हें शेयर नहीं करता, तब तक वे किसी सर्वर पर नहीं जातीं। कंपनी का कहना है कि केवल तब डेटा सर्वर पर जाता है जब यूजर फोटो या वीडियो पर एआई फीचर्स का इस्तेमाल करता है।
मेटा के मुताबिक एआई सिस्टम को बेहतर बनाने और उसकी सटीकता बढ़ाने के लिए कुछ मामलों में इंसानी समीक्षा की जरूरत पड़ती है। कंपनी का दावा है कि यह प्रक्रिया उनकी प्राइवेसी पॉलिसी में पहले से बताई गई है और इसका मकसद केवल सेवा की गुणवत्ता को सुधारना है।
यह विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि एआई आधारित स्मार्ट डिवाइस का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार 2025 में मेटा के स्मार्ट ग्लासेज की बिक्री लाखों में पहुंच गई थी। ऐसे में यह मामला तकनीकी कंपनियों की जिम्मेदारी और यूजर्स की निजता के बीच संतुलन को लेकर एक बड़ी बहस को जन्म दे सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह कानूनी लड़ाई तय करेगी कि टेक कंपनियां अपने उत्पादों के विज्ञापनों में जो प्राइवेसी का वादा करती हैं, क्या उनके गैजेट्स वास्तव में उसी स्तर की सुरक्षा प्रदान करते हैं या नहीं।