नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के बीच हुई महत्वपूर्ण टेलीफोनिक बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय तेल टैंकरों को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है।
कठिन समय में भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहाँ से वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। वर्तमान युद्ध की स्थिति में इस मार्ग पर जहाजों का ट्रैफिक लगभग 90% तक कम हो गया है और कई देशों के टैंकर वहां फंसे हुए हैं।
ऐसी तनावपूर्ण परिस्थितियों में भी भारतीय जहाजों को रास्ता मिलना भारत की सक्रिय और सफल विदेश नीति का प्रमाण है, जिससे देश में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बाधित नहीं होगी।
पश्चिमी देशों पर प्रतिबंध बरकरार, भारत को मिली विशेष रियायत
ईरान ने स्पष्ट किया है कि यह विशेष छूट केवल भारत के लिए है।
प्रतिबंध: अमेरिका, यूरोप और इजरायल से जुड़े जहाजों पर इस मार्ग से गुजरने के लिए कड़े प्रतिबंध फिलहाल जारी रहेंगे।
कूटनीतिक संतुलन: एस. जयशंकर ने न केवल ईरान के साथ तालमेल बिठाया, बल्कि रूस के विदेश मंत्री सेर्गेई लावरोव और फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो से भी चर्चा की। इस बहुपक्षीय संवाद का उद्देश्य समुद्री व्यापारिक मार्गों को खुला रखना और वैश्विक सप्लाई चैन को टूटने से बचाना था।
युद्ध के बीच भारत का बढ़ता प्रभाव
जंग के 12वें दिन जहां क्षेत्र में 1,690 से अधिक मौतें हो चुकी हैं और ईरान-इजरायल एक-दूसरे पर मिसाइल हमले कर रहे हैं, भारत सभी पक्षों के साथ संवाद स्थापित करने में सक्षम रहा है।
एक ओर इजरायल ने तेहरान और तबरीज में कमांड सेंटर तबाह किए हैं, तो दूसरी ओर रूस के राष्ट्रपति पुतिन भी युद्ध रोकने की कोशिशों में जुटे हैं। ऐसे अस्थिर माहौल में अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना भारत की बड़ी उपलब्धि है।