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विधानसभा में गूंजी कलाकारों के सम्मान की आवाज़ : विधायक अनुज शर्मा ने पड़ोसी राज्यों की तर्ज पर मानदेय बढ़ाने की रखी मांग

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रायपुर – धरसींवा विधायक और प्रख्यात कलाकार अनुज शर्मा ने छत्तीसगढ़ विधानसभा में संस्कृति विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान प्रदेश के कलाकारों का मुद्दा प्रखरता से उठाया। उन्होंने सदन का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि, छत्तीसगढ़ के कलाकारों को मिलने वाला मानदेय अन्य राज्यों (जैसे मध्य प्रदेश या महाराष्ट्र) की तुलना में बहुत ही कम है। 

श्री शर्मा ने कहा- छत्तीसगढ़ की पहचान यहाँ की लोक कला (नाचा, गम्मत, पंडवानी, भरथरी) से है। कलाकार राज्य की संस्कृति का ध्वजवाहक होता है, छत्तीसगढ़ की संस्कृति और कला को देश-दुनिया में पहचान दिलाने वाले कलाकार आज भी उचित पारिश्रमिक के लिए संघर्ष कर रहे हैं। लेकिन जब उन्हें उचित पारिश्रमिक नहीं मिलता, तो वह आर्थिक तंगी से जूझने को मजबूर हो जाता है। जो कलाकार पूरी दुनिया को हंसाता है और मनोरंजन करता है, वह खुद अपने घर की जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहा है।

पड़ोसी राज्यों का दिया उदाहरण
उन्होंने पड़ोसी राज्यों और अन्य विकसित राज्यों के मानदेय ढांचे का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां कलाकारों को दी जाने वाली राशि छत्तीसगढ़ की तुलना में कहीं अधिक सम्मानजनक है।विधायक ने रेखांकित किया कि वर्तमान मानदेय दरें बढ़ती महंगाई और कलाकारों की मेहनत के अनुरूप नहीं हैं।कलाकारों के मानदेय में वृद्धि न केवल आर्थिक सहायता है बल्कि उनके हुनर का सम्मान भी है। कलकारों की सिर्फ़ ताली नहीं, थाली भी भारी होनी चाहिए। 

कला जीवित रखने के लिए कलाकार का सशक्त होना जरूरी
यदि कलाकार आर्थिक रूप से सशक्त नहीं होगा, तो वह अपनी कला को जीवित नहीं रख पाएगा। छत्तीसगढ़ की संस्कृति को बचाने के लिए कलाकारों का आर्थिक संरक्षण अनिवार्य है। श्रीं शर्मा नें मांग की कि कलाकारों की श्रेणियों (Grade) और उनके मानदेय का पुनरीक्षण किया जाए ताकि वरिष्ठ और नए कलाकारों को उनकी मेहनत का सही मूल्य मिले।विधायक शर्मा ने वृद्ध कलाकारों की पेंशन राशि बढ़ाने और उनके स्वास्थ्य बीमा जैसी सुविधाओं को सुनिश्चित करने की बात भी सदन में रखी।

संस्कृति मंत्री ने इस विसंगति को स्वीकारा
संस्कृति मंत्री ने इस विसंगति को स्वीकार किया है और आने वाले समय में मानदेय में वृद्धि की संभावनाओं पर विचार करने का आश्वासन दिया है। प्रदेश के लोक कलाकारों, गायकों के बीच इस चर्चा से एक नई उम्मीद जगी है कि अब उनके हितों के लिए सदन में एक मजबूत आवाज मौजूद है।

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