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रायपुर में युवक की पिटाई से मौत के मामले में बड़ा फैसला, पांच सुरक्षाकर्मियों को उम्रकैद

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रायपुर के मौदहापारा थाना क्षेत्र में तीन साल पहले हुई एक युवक की हत्या के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस मामले में दोषी पाए गए पांच आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सभी आरोपी आंबेडकर अस्पताल में सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत थे और उन्होंने युवक को चोर समझकर बेरहमी से पीट दिया था, जिससे उसकी बाद में इलाज के दौरान मौत हो गई।

यह मामला Dr. Bhimrao Ambedkar Memorial Hospital के आसपास का है। मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश पंकज सिन्हा की अदालत में हुई, जहां उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपियों को दोषी करार दिया गया। अदालत ने पाया कि आरोपियों द्वारा की गई मारपीट ही युवक की मौत का कारण बनी।

अतिरिक्त लोक अभियोजक पूजा मोहिते के अनुसार अदालत ने रोहित कुमार कुशवाहा की हत्या के मामले में पांचों आरोपियों को दोषी माना। जिन लोगों को सजा सुनाई गई है उनमें सुभाषचंद्र यादव, भूपेंद्र मिश्रा, जयनारायण सिंह और योगेंद्र मिश्रा सहित अन्य आरोपी शामिल हैं। ये सभी आरोपी मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के निवासी बताए गए हैं और उस समय अस्पताल में सुरक्षा गार्ड के रूप में काम कर रहे थे।

पुलिस द्वारा अदालत में पेश की गई केस डायरी के अनुसार यह घटना वर्ष 2023 की है। 5 और 6 की दरमियानी रात रोहित आंबेडकर अस्पताल के पास स्थित फिजियोथेरेपी कॉलेज के आसपास घूम रहा था। उसी दौरान वहां ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा गार्डों ने उसे चोर समझ लिया और बिना किसी पूछताछ के उसकी बेरहमी से पिटाई कर दी। मारपीट इतनी गंभीर थी कि युवक अधमरा हो गया।

बाद में सुरक्षा गार्डों ने ही उसे अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद मामला गंभीर हो गया और पुलिस ने जांच शुरू की।

मृतक के परिजनों ने अपने बयान में बताया था कि रोहित काम की तलाश में रायपुर आया हुआ था। कई दिनों से उसे काम नहीं मिल रहा था और वह भूखा-प्यासा भटक रहा था। इसी दौरान वह अस्पताल क्षेत्र के आसपास पहुंच गया था, जहां सुरक्षाकर्मियों ने बिना कुछ पूछे उसे चोर समझ लिया और बुरी तरह पीट दिया।

घटना के बाद आरोपियों ने स्वयं थाने में सूचना दी थी, लेकिन पुलिस ने जब घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली तो पूरी घटना सामने आ गई। फुटेज के आधार पर पुलिस ने आरोपियों की पहचान की और उन्हें गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया।

लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस फैसले को पीड़ित परिवार के लिए न्याय के रूप में देखा जा रहा है, जबकि यह मामला सुरक्षा कर्मियों की जिम्मेदारी और कानून के पालन को लेकर भी एक बड़ा संदेश देता है।

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