पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऊर्जा संकट की आशंकाओं के बीच देश में एलपीजी सिलिंडर को लेकर पिछले कुछ दिनों से अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिल रहा था। हालांकि अब हालात में कुछ सुधार के संकेत दिखाई देने लगे हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार एलपीजी सिलिंडर की बुकिंग में कमी दर्ज की गई है, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि घबराहट में हो रही अतिरिक्त खरीदारी धीरे-धीरे कम हो रही है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 14 मार्च को एलपीजी बुकिंग लगभग 77 लाख दर्ज की गई, जबकि एक दिन पहले यह करीब 88.8 लाख थी। बुकिंग में यह गिरावट इस बात का संकेत मानी जा रही है कि लोगों में फैली घबराहट कम हो रही है और स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल या खाना पकाने की गैस की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति पूरी तरह स्थिर बनी हुई है।
सरकार के अनुसार देश के सभी तेल शोधन संयंत्र पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार भी उपलब्ध है। यही वजह है कि पेट्रोल और डीजल की घरेलू मांग को पूरा करने में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं है। सरकार ने यह भी कहा कि भारत पेट्रोल और डीजल के उत्पादन में काफी हद तक आत्मनिर्भर है और घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भरता बहुत कम है।
सरकार की ओर से जारी दैनिक अपडेट में बताया गया कि देशभर में ईंधन की खुदरा बिक्री सामान्य तरीके से जारी है और तेल विपणन कंपनियों को कहीं से भी ईंधन की कमी की सूचना नहीं मिली है। पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति लगातार जारी है और किसी तरह की आपूर्ति बाधित नहीं हुई है।
एलपीजी बुकिंग के आंकड़ों में एक और दिलचस्प बदलाव देखा गया है। सरकार के अनुसार ऑनलाइन बुकिंग का प्रतिशत भी बढ़ा है। पहले जहां लगभग 84 प्रतिशत बुकिंग डिजिटल माध्यम से हो रही थी, अब यह बढ़कर करीब 87 प्रतिशत हो गई है। तेल कंपनियों द्वारा चलाए गए अभियान के कारण लोगों को ऑनलाइन बुकिंग के लिए प्रोत्साहित किया गया, जिससे डीलरों के बाहर लगने वाली लंबी कतारों में कमी आई है।
इस बीच कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने गैर-घरेलू एलपीजी के वितरण को लेकर भी निर्देश जारी किए हैं। बिहार, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान सहित कई राज्यों ने सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार वाणिज्यिक एलपीजी सिलिंडरों के आवंटन को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया है। इसके तहत व्यावसायिक सिलिंडर राज्य सरकारों के पास उपलब्ध कराए गए हैं ताकि जरूरत के अनुसार उन्हें उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा सके।
देशभर में स्थिति पर नजर रखने के लिए 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किए हैं। इन नियंत्रण कक्षों के माध्यम से एलपीजी की आपूर्ति और वितरण की लगातार निगरानी की जा रही है। इसके अलावा एलपीजी की मांग पर दबाव कम करने के लिए कुछ क्षेत्रों में वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल की अनुमति भी दी गई है। खासतौर पर होटल, रेस्तरां और आतिथ्य उद्योग से जुड़े क्षेत्रों में केरोसिन और कोयले जैसे विकल्पों का इस्तेमाल करने की छूट दी गई है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि ईंधन की जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। कई राज्यों में एलपीजी सिलिंडरों की अवैध जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग के खिलाफ छापेमारी की जा रही है। आंध्र प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में प्रशासन ने इस तरह की गतिविधियों पर कार्रवाई शुरू कर दी है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर जरूर पड़ा है। जहां पहले कच्चे तेल की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी, वहीं अब यह बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। इसके बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें फिलहाल स्थिर रखी गई हैं।
हालांकि इस स्थिति से सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। बताया जा रहा है कि कंपनियां बढ़ते नुकसान को नियंत्रित करने के लिए रिफाइनरियों पर कुछ वित्तीय बोझ डालने के विकल्प पर विचार कर रही हैं। इसके तहत रिफाइनरी ट्रांसफर प्राइस यानी वह आंतरिक दर, जिस पर रिफाइनरियां विपणन कंपनियों को ईंधन बेचती हैं, उसमें बदलाव किया जा सकता है।
कुल मिलाकर सरकार का कहना है कि देश में ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है। लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और घबराहट में ईंधन या गैस सिलिंडर की अनावश्यक खरीदारी से बचें, क्योंकि इससे बाजार में कृत्रिम संकट पैदा हो सकता है।