देश में आयकर प्रणाली को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और सरल बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार 1 अप्रैल से नया आयकर कानून लागू करने जा रही है। इस बड़े बदलाव की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने के लिए Income Tax Department India ने देशभर में विशेष जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी की है। इस अभियान की औपचारिक शुरुआत केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman करेंगी। इसके बाद करीब तीन महीने तक देश के अलग-अलग राज्यों में सेमिनार, कार्यशालाएं और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इन कार्यक्रमों का उद्देश्य नए आयकर कानून को आम करदाताओं तक सरल भाषा में समझाना है। अभियान के तहत Madhya Pradesh और Chhattisgarh सहित कई राज्यों में भी विशेष सेमिनार और कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इनमें आयकर विभाग के अधिकारी, चार्टर्ड अकाउंटेंट, टैक्स सलाहकार, विद्यार्थी और आम करदाता भाग लेंगे, ताकि नए नियमों को बेहतर तरीके से समझा जा सके।
दरअसल भारत में आयकर से जुड़ा जो मौजूदा कानून लागू है, वह करीब 64 साल पुराना है। बदलती अर्थव्यवस्था, डिजिटल व्यवस्था और कर प्रणाली की जरूरतों को देखते हुए सरकार ने इसमें बदलाव करने का फैसला किया है। नए कानून के जरिए आयकर व्यवस्था को अधिक आधुनिक और डिजिटल बनाने की दिशा में कदम उठाया गया है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि नए कानून के साथ आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
सरकार का कहना है कि नए नियमों के तहत करदाताओं के लिए प्रक्रियाएं काफी हद तक सरल बनाई गई हैं। आयकर रिटर्न और संशोधित रिटर्न दाखिल करने के लिए अब पहले की तुलना में ज्यादा समय मिलेगा। इसके साथ ही टैक्स रिफंड की प्रक्रिया को भी आसान बनाने की कोशिश की गई है, जिससे करदाताओं को अपना रिफंड जल्दी और बिना ज्यादा परेशानी के मिल सके।
टीडीएस करेक्शन स्टेटमेंट से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है। पहले इसमें सुधार करने के लिए छह साल तक का समय मिलता था, लेकिन अब इसे घटाकर दो साल कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे कर प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और समयबद्ध बनेगी।
नए आयकर कानून में घाटे को आगे के वर्षों में समायोजित करने यानी कैरी फॉरवर्ड से जुड़े नियमों को भी सरल किया गया है। इसके अलावा कुछ शब्दावली में भी बदलाव किया गया है ताकि नियमों को समझना आसान हो सके। उदाहरण के तौर पर पहले इस्तेमाल होने वाले “असेसमेंट ईयर” और “प्रीवियस ईयर” जैसे शब्दों की जगह अब “टैक्स ईयर” शब्द का इस्तेमाल किया जाएगा। इसी तरह “लेजर” की जगह “इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड” शब्द शामिल किया गया है, जो डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
नए कानून में “प्रोफेशन” शब्द को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है, ताकि सेवा क्षेत्र और बड़े पेशेवरों से जुड़े लोगों को कर नियमों के तहत अधिक स्पष्ट रूप से कवर किया जा सके।
कुछ आर्थिक गतिविधियों पर टैक्स कलेक्शन एट सोर्स यानी टीसीएस की दरों में भी बदलाव किया गया है। शराब, स्क्रैप, कोयला, लिग्नाइट और लौह अयस्क जैसी वस्तुओं की बिक्री पर पहले की तुलना में अधिक टीसीएस लागू किया जाएगा। इसके अलावा शेयर बायबैक से होने वाली आय पर भी नए प्रावधान के तहत कैपिटल गेन टैक्स लागू करने का प्रावधान किया गया है।
नए नियमों के तहत आयकर जांच प्रक्रिया में डिजिटल माध्यमों को भी अधिक महत्व दिया गया है। जांच के दौरान अधिकारियों को ई-मेल और सोशल मीडिया से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड तक पहुंचने का अधिकार भी मिल सकता है, ताकि वित्तीय गतिविधियों की जांच अधिक पारदर्शी तरीके से की जा सके।
कुल मिलाकर सरकार का मानना है कि नया आयकर कानून करदाताओं के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाएगा, कानूनी उलझनों को कम करेगा और कर प्रणाली को डिजिटल तथा आधुनिक स्वरूप देने में मदद करेगा। इसलिए आने वाले महीनों में देशभर में चलने वाले जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए लोगों को इन बदलावों की विस्तृत जानकारी दी जाएगी।