भारत की प्रमुख डिजिटल पेमेंट कंपनी PhonePe ने फिलहाल अपनी पब्लिक मार्केट लिस्टिंग यानी आईपीओ की प्रक्रिया को रोकने का फैसला किया है। कंपनी ने सोमवार को घोषणा करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते जियो-पॉलिटिकल तनाव और शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
कंपनी का कहना है कि जब वैश्विक पूंजी बाजार में स्थिरता आएगी, तब आईपीओ प्रक्रिया को फिर से शुरू किया जाएगा। इस फैसले पर कंपनी के सीईओ Sameer Nigam ने कहा कि कंपनी प्रभावित क्षेत्रों में जल्द शांति बहाली की उम्मीद करती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल लिस्टिंग को टाला गया है, लेकिन कंपनी भारत में ही पब्लिक लिस्टिंग के अपने इरादे पर कायम है।
फोनपे की शुरुआत साल 2016 में हुई थी और तब से यह भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में तेजी से उभरी है। कंपनी ने यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस यानी Unified Payments Interface के जरिए अपने डिजिटल पेमेंट ऐप को लॉन्च किया था। समय के साथ यह प्लेटफॉर्म देश के सबसे लोकप्रिय भुगतान माध्यमों में शामिल हो गया।
30 सितंबर 2025 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कंपनी के पास 65 करोड़ से अधिक रजिस्टर्ड यूजर्स हैं। इसके अलावा इसका डिजिटल पेमेंट नेटवर्क देशभर में 4.7 करोड़ से ज्यादा व्यापारियों तक फैला हुआ है, जो इसके जरिए भुगतान स्वीकार करते हैं।
फोनपे अब केवल एक पेमेंट ऐप तक सीमित नहीं रहा। कंपनी ने कई अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार किया है। इसमें उपभोक्ता भुगतान सेवाएं, व्यापारियों के लिए पेमेंट समाधान, लोन और इंश्योरेंस वितरण जैसी सेवाएं शामिल हैं। इसके अलावा कंपनी शेयर बाजार से जुड़ी सेवाओं जैसे स्टॉक ब्रोकिंग और म्यूचुअल फंड वितरण में भी सक्रिय है।
कंपनी ने हाल ही में एक एंड्रॉइड आधारित ऐप मार्केटप्लेस भी लॉन्च किया है, जिसे Indus Appstore के नाम से जाना जाता है। इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य भारतीय डेवलपर्स को एक वैकल्पिक ऐप वितरण मंच उपलब्ध कराना है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों ने निवेशकों के रुझान को प्रभावित किया है। रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व में जारी तनाव जैसे घटनाक्रमों के कारण वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे माहौल में विदेशी निवेशक उभरते बाजारों में निवेश को लेकर अधिक सतर्क नजर आ रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार फोनपे जैसी बड़ी वैल्यूएशन वाली कंपनी के लिए आईपीओ का सही समय चुनना बेहद महत्वपूर्ण होता है। अगर बाजार में निवेशकों का उत्साह कम हो, तो कंपनी को उम्मीद के मुताबिक मूल्यांकन और निवेश नहीं मिल पाता। इसलिए कंपनी फिलहाल बाजार के स्थिर होने का इंतजार कर रही है।