अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अब खेल की दुनिया को भी अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। 2026 के फीफा वर्ल्ड कप से पहले ईरान की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम को लेकर जो अनिश्चितता पैदा हुई है, उसने पूरे टूर्नामेंट पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालात इतने संवेदनशील हो चुके हैं कि ईरान खुद अपने मैचों को अमेरिका से हटाकर मैक्सिको में करवाने की मांग कर रहा है। यह सिर्फ खेल का मुद्दा नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा का गंभीर मामला बन चुका है।
ईरान के फुटबॉल महासंघ के अध्यक्ष मेहदी ताज ने साफ संकेत दे दिए हैं कि मौजूदा हालात में अमेरिका में खेलना उनकी टीम के लिए सुरक्षित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जब खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यह स्वीकार कर चुके हैं कि वे ईरानी टीम की सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकते, तो ऐसे में वहां जाना जोखिम भरा फैसला होगा। इसी कारण ईरान ने फीफा से अपील की है कि उसके मुकाबले मैक्सिको में शिफ्ट किए जाएं।
दरअसल, यह पूरा विवाद फरवरी के आखिर में शुरू हुए अमेरिका और इज़राइल के ईरान पर हवाई हमलों के बाद तेजी से बढ़ा है। इस संघर्ष ने न सिर्फ पश्चिम एशिया को अस्थिर किया है, बल्कि इसका असर अब वैश्विक आयोजनों तक पहुंच चुका है। ईरान के खेल मंत्री ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि अगर हालात नहीं सुधरे तो टीम का वर्ल्ड कप में हिस्सा लेना मुश्किल हो सकता है।
हालांकि, दूसरी तरफ एक दिलचस्प विरोधाभास भी देखने को मिल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एक ओर जहां ईरान को वर्ल्ड कप में भाग लेने की अनुमति देने की बात कही, वहीं दूसरी ओर यह भी स्वीकार किया कि उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरे हैं। यानी स्वागत भी और चेतावनी भी—यह दोहरा संदेश पूरे मामले को और पेचीदा बना देता है।
ईरान की टीम ने 2026 वर्ल्ड कप के लिए शानदार प्रदर्शन करते हुए बहुत पहले ही क्वालिफाई कर लिया था। 25 मार्च 2025 को वह इस टूर्नामेंट के लिए क्वालिफाई करने वाली पहली एशियाई टीम बनी थी। मौजूदा शेड्यूल के मुताबिक उसे लॉस एंजिलिस और सिएटल जैसे अमेरिकी शहरों में अपने ग्रुप मैच खेलने थे। लेकिन अब वही शेड्यूल उसके लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
हालात इतने तेजी से बदल रहे हैं कि अब यह संभावना भी जताई जा रही है कि अगर सुरक्षा को लेकर कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, तो ईरान आखिरी समय में टूर्नामेंट से नाम वापस ले सकता है। अगर ऐसा होता है तो फीफा को किसी दूसरी टीम को मौका देने का फैसला लेना पड़ेगा, जो अपने आप में एक बड़ा विवाद बन सकता है।
हालांकि, एशियाई फुटबॉल परिसंघ ने अभी तक ऐसी किसी आधिकारिक जानकारी से इनकार किया है कि ईरान टूर्नामेंट से हट रहा है। उनका कहना है कि ईरान ने अब तक खेलने का इरादा जताया है, लेकिन जमीनी हालात और राजनीतिक तनाव किसी भी वक्त तस्वीर बदल सकते हैं।
स्पष्ट है कि यह सिर्फ एक खेल आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक राजनीति का अखाड़ा बनता जा रहा है। सवाल अब यह है कि क्या फीफा इस संवेदनशील स्थिति को संभाल पाएगा या फिर 2026 वर्ल्ड कप से पहले ही एक बड़ा विवाद जन्म ले लेगा।