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विधानसभा में जंबूरी घोटाले का आरोप: टेंडर से पहले काम पर सरकार घिरी, विपक्ष का वॉकआउट

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छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज जंबूरी कार्यक्रम को लेकर बड़ा राजनीतिक घमासान देखने को मिला। बालोद में आयोजित इस कार्यक्रम में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस विधायक Raghavendra Singh ने सरकार से तीखे सवाल पूछे। उन्होंने जानना चाहा कि जब टेंडर प्रक्रिया पूरी भी नहीं हुई थी, तब काम कैसे शुरू कर दिया गया और महज चार दिन में पूरा आयोजन कैसे संपन्न हो गया।

इस पर जवाब देते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री Gajendra Yadav ने सीधे जवाब देने के बजाय पहले शायरी सुनाई और फिर कहा कि “नेशनल का काम अलग था और हमारा काम अलग।” उनके इस जवाब से विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ और सदन में तीखी बहस छिड़ गई।

मंत्री ने सफाई देते हुए कहा कि जंबूरी आयोजन की प्रक्रिया उनके अध्यक्ष बनने से पहले ही शुरू हो चुकी थी और स्थल चयन भी पहले ही तय कर लिया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि टेंडर उनके कहने पर नहीं, बल्कि राज्य कार्यकारिणी के निर्णय के अनुसार जारी किया गया था। हालांकि विपक्ष का आरोप रहा कि टेंडर खुलने से पहले ही काम शुरू होना गंभीर अनियमितता की ओर इशारा करता है।

मामले में तीखी नोकझोंक तब और बढ़ गई जब विधायक Sushant Shukla ने बीच में टिप्पणी करते हुए मुद्दे को भटकाने की कोशिश की, जिस पर विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया। कांग्रेस नेताओं ने इस पूरे मामले की विधानसभा समिति से जांच कराने की मांग भी उठाई।

सदन में नेता प्रतिपक्ष Charandas Mahant ने कहा कि पहले भी इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब नहीं मिला था और आज भी सरकार जवाब देने से बच रही है। इसी के विरोध में विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया।

इसी बीच विधानसभा में अन्य मुद्दे भी गर्माए रहे। युक्तियुक्तकरण के तहत स्कूलों के मर्ज होने और खाली भवनों के उपयोग को लेकर सवाल उठे। सरकार ने बताया कि 10,000 से ज्यादा स्कूलों का मर्जर किया गया है और नए सत्र में खाली भवनों के उपयोग की योजना बनाई जाएगी।

अतिथि शिक्षकों का मुद्दा भी सदन में गूंजा। विपक्ष ने उनके नियमितीकरण और वेतन व्यवस्था पर सवाल उठाए, लेकिन मंत्री ने साफ कहा कि नियमितीकरण की कोई योजना नहीं है। इस जवाब से नाराज विपक्ष ने हंगामा किया और नारेबाजी के बीच सदन से बहिर्गमन कर दिया।

कुल मिलाकर, आज का विधानसभा सत्र सवालों, जवाबों और राजनीतिक टकराव के बीच बेहद गरमाया रहा। जंबूरी कार्यक्रम में अनियमितता के आरोप अब एक बड़े राजनीतिक मुद्दे के रूप में उभरते नजर आ रहे हैं, जिस पर आने वाले दिनों में और बहस होने की संभावना है।

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