छत्तीसगढ़ विधानसभा के आज के सत्र में राजनीतिक माहौल बेहद गरम रहने वाला है, जहां सबसे अहम मुद्दा छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पर चर्चा का रहेगा। इस विधेयक को उप मुख्यमंत्री और गृहमंत्री Vijay Sharma सदन में पेश करेंगे और विस्तृत बहस के बाद इसे पारित कराने की कोशिश की जाएगी। सरकार इसे अपने प्रमुख विधायी एजेंडे के रूप में आगे बढ़ा रही है, इसलिए इस पर लंबी और तीखी बहस की संभावना है।
इसी बीच चैत्र नवरात्र और हिंदू नववर्ष के पहले दिन भी सदन की कार्यवाही जारी रहने पर नेता प्रतिपक्ष Charan Das Mahant ने अपनी नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा कि जब संसद में अवकाश दिया गया, तो यहां भी त्योहार के दिन छुट्टी होनी चाहिए थी। उनके इस बयान ने सदन के माहौल को और राजनीतिक रंग दे दिया।
सत्र के दौरान सीतापुर विधायक Ramkumar Toppo ने वीरता पदक प्राप्त करने वाले जवानों के मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने सवाल किया कि वीरता पदक किन परिस्थितियों में दिए जाते हैं और क्या राज्य सरकार ऐसे वीर जवानों के लिए पर्याप्त सुविधाएं दे रही है। उन्होंने मांग रखी कि पदक प्राप्तकर्ताओं को सिर्फ सम्मान राशि ही नहीं, बल्कि जमीन, रोजगार, सरकारी भर्तियों में प्राथमिकता, परिवहन सुविधा, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और उनके बच्चों की शिक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए जाने चाहिए।
इस पर जवाब देते हुए गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि वर्तमान में पदक प्राप्त करने वाले जवानों को मासिक आर्थिक सहायता, रेलवे पास और आयकर में छूट जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि समय के साथ नई सुविधाओं की जरूरत है और इस पर सरकार गंभीरता से विचार करेगी।
सदन में एक और बड़ा मुद्दा आयुष्मान योजना से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर उठा। कांग्रेस विधायक Kunwar Singh Nishad ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में डॉक्टरों के दबाव में कर्मचारियों के खातों में प्रोत्साहन राशि डाली गई। उन्होंने इस पूरे मामले की दोबारा जांच की मांग की।
स्वास्थ्य मंत्री Shyam Bihari Jaiswal ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जांच में किसी भी तरह की आर्थिक अनियमितता नहीं पाई गई और यह सिर्फ तकनीकी त्रुटि का मामला था। हालांकि विपक्ष इस जवाब से संतुष्ट नजर नहीं आया और मामले को गंभीर वित्तीय गड़बड़ी बताते हुए कार्रवाई की मांग करता रहा।
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि आज का विधानसभा सत्र केवल विधेयक तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कई संवेदनशील मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिलेगी। अब नजर इस बात पर टिकी है कि धर्म स्वातंत्र्य विधेयक पर क्या फैसला होता है और उठाए गए अन्य मुद्दों पर सरकार क्या रुख अपनाती है।