पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने एक बार फिर शांति और कूटनीति की राह को प्राथमिकता देने का संदेश दिया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron से फोन पर बातचीत कर क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बातचीत की जानकारी साझा करते हुए कहा कि दोनों नेताओं के बीच पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालात पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि मौजूदा संकट को और बढ़ने से रोकने के लिए तत्काल ‘डी-एस्केलेशन’ यानी तनाव कम करना बेहद जरूरी है।
पीएम मोदी ने दोहराया कि हिंसा किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकती। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से अपील की कि वे टकराव का रास्ता छोड़कर संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान तलाशें। भारत लगातार इस क्षेत्र में संयम और शांति बनाए रखने की बात करता रहा है और यही उसकी विदेश नीति का प्रमुख आधार भी है।
इस बातचीत को वैश्विक स्तर पर भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल सकता है। ऐसे समय में भारत और फ्रांस जैसे देशों की कूटनीतिक पहल शांति बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
कुल मिलाकर, भारत ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी संघर्ष का समाधान बातचीत और सहयोग के जरिए ही देखता है, न कि युद्ध और टकराव के माध्यम से।