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नेशनल डिफेंस कॉलेज के टीम का सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र भ्रमण, इस्पात उत्पादन प्रक्रियाओं का किया अवलोकन

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नई दिल्ली स्थित नेशनल डिफेंस कॉलेज की उच्च स्तरीय टीम ने 19 मार्च, 2026 को सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र का भ्रमण कर प्रमुख उत्पादन इकाइयों में इस्पात निर्माण की प्रक्रियाओं का अवलोकन किया, जिसमें वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भी शामिल रहें।

भ्रमण के प्रारंभ में इस्पात भवन में संवादात्मक बैठक के दौरान निदेशक प्रभारी (सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र) श्री चित्त रंजन महापात्र, कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन) श्री पवन कुमार तथा कार्यपालक निदेशक (संकार्य) श्री राकेश कुमार सहित संयंत्र के वरिष्ठ अधिकारियों ने टीम के गणमान्य सदस्यों का स्वागत किया। इस अवसर पर पुलिस महानिरीक्षक (दुर्ग-भिलाई) श्री अभिषेक शांडिल्य एवं एसएसपी (भिलाई) श्री विजय अग्रवाल समेत पुलिस विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

संवादात्मक बैठक के दौरान टीम को उप प्रबंधक (जनसंपर्क विभाग) सुश्री शालिनी चौरसिया द्वारा एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण के माध्यम से संयंत्र के उत्पादन, प्रमुख इकाइयों एवं शॉप्स की कार्यप्रणाली, उत्पादन प्रक्रियाओं, उत्पाद मिश्रण तथा समग्र उत्पादन उपलब्धियों पर व्यापक जानकारी साझा की गई। इसके उपरांत संयंत्र में प्रवेश से पूर्व आवश्यक सुरक्षा प्रोटोकॉल की जानकारी दी गई।

टीम के सदस्यों ने उत्पादन से जुड़े विभिन्न मापदंडों एवं परिचालन प्रक्रियाओं पर गहन चर्चा की तथा भिलाई इस्पात संयंत्र के राष्ट्र की सामरिक एवं रक्षा अवसंरचना में महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की।

संयंत्र भ्रमण के दौरान टीम ने ब्लास्ट फर्नेस-8 में हॉट मेटल उत्पादन, स्टील मेल्टिंग शॉप-3 में क्रूड स्टील निर्माण तथा यूनिवर्सल रेल मिल में विश्व की सबसे लंबी 130 मीटर रेल के रोलिंग की प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से देखा। आधुनिकीकृत इकाइयों—बीएफ-8, एसएमएस-3 एवं यूनिवर्सल रेल मिल—की उच्च दक्षता, विशालता एवं उन्नत तकनीकी क्षमताओं ने आगंतुकों को विशेष रूप से प्रभावित किया।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 1960 में रक्षा मंत्रालय के अधीन स्थापित नेशनल डिफेंस कॉलेज देश का प्रमुख संस्थान है, जहां वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों एवं सिविल सेवकों को राष्ट्रीय सुरक्षा एवं सामरिक विषयों पर उच्चस्तरीय प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। संस्थान द्वारा भू-राजनीति, रक्षा रणनीति, अर्थव्यवस्था तथा उभरती प्रौद्योगिकियों से संबंधित व्यापक पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं, जिनमें भारतीय एवं मित्र देशों के अधिकारियों की सहभागिता होती है।

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