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सक्ती में जमीन विवाद बना हत्या की वजह, दिव्यांग शिक्षक की बेरहमी से हत्या, शव जलाकर सबूत मिटाने की कोशिश

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छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां जमीन विवाद ने एक मासूम और दिव्यांग शिक्षक की जान ले ली। यह मामला न सिर्फ हत्या का है, बल्कि इंसानियत को झकझोर देने वाली क्रूरता का भी उदाहरण बन गया है।

जैजैपुर थाना क्षेत्र के ग्राम जर्वे में रहने वाले 42 वर्षीय शिक्षक देवानंद भारद्वाज, जो दोनों पैरों से दिव्यांग थे, उनकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। आरोप है कि गांव के ही रहने वाले टीमन लाल मनहर ने जमीन के सौदे को लेकर इस वारदात को अंजाम दिया। बताया जा रहा है कि शिक्षक ने आरोपी को जमीन खरीदने के लिए 7 लाख रुपये दिए थे, लेकिन न तो जमीन की रजिस्ट्री कराई गई और न ही पैसे लौटाए गए।

घटना की शुरुआत एक साधारण विवाद से हुई, जो धीरे-धीरे हिंसा में बदल गया। 19 मार्च की शाम पान दुकान के पास दोनों के बीच बहस हुई, जहां देवानंद ने या तो जमीन की रजिस्ट्री कराने या अपने पैसे वापस देने की मांग की। इस बात से नाराज होकर आरोपी ने पहले मारपीट की और बाद में सुनसान जगह पर कुल्हाड़ी से हमला कर शिक्षक का गला काट दिया।

हत्या के बाद आरोपी यहीं नहीं रुका। उसने सबूत मिटाने की कोशिश में शिक्षक के शव को उनकी ट्राइसाइकिल समेत आग के हवाले कर दिया। इस भयावह घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।

घटनास्थल से खून के निशान और जले हुए अवशेष बरामद किए गए हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि शव को जलाने के लिए किस पदार्थ का इस्तेमाल किया गया। पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है।

फिलहाल आरोपी फरार है, लेकिन पुलिस ने उसके खिलाफ हत्या और सबूत मिटाने की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस की दो टीमें लगातार दबिश दे रही हैं और दावा किया जा रहा है कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि छोटे-छोटे विवाद किस तरह खतरनाक मोड़ ले सकते हैं। खासकर जब मामला विश्वास और पैसों से जुड़ा हो, तो सतर्कता और कानूनी प्रक्रिया का पालन करना बेहद जरूरी हो जाता है।

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