मध्य पूर्व में जारी तनाव अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है, जहां Iran और Israel के बीच टकराव ने एक बार फिर वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। ताज़ा घटनाक्रम में ईरान द्वारा इजरायल पर किए गए मिसाइल हमलों ने हालात को और ज्यादा गंभीर बना दिया है।
गुरुवार देर रात हुए इन हमलों के बाद यरूशलम, मध्य इजरायल और वेस्ट बैंक के कई इलाकों में सायरन गूंज उठे। लोग घबराकर अपने घरों से निकलकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागते नजर आए। इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि अब यह संघर्ष सीमित दायरे से निकलकर बड़े युद्ध का रूप ले सकता है।
इस पूरे तनाव का असर सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि United States को भी भारी नुकसान झेलना पड़ा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक अमेरिकी सेना के 16 सैन्य विमान नष्ट हो चुके हैं। इनमें 10 MQ-9 रीपर ड्रोन शामिल हैं, जिन्हें ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम ने मार गिराया।
स्थिति को और चौंकाने वाला बनाता है यह तथ्य कि कुछ नुकसान तकनीकी खामियों और ‘फ्रेंडली फायर’ की वजह से भी हुआ है। कुवैत में गलती से हुई फायरिंग में तीन F-15 लड़ाकू विमान गिर गए, जबकि एक KC-135 टैंकर हवा में ही विस्फोट का शिकार हो गया, जिसमें सवार सभी छह क्रू मेंबर्स की मौत हो गई। वहीं सऊदी अरब के एक सैन्य ठिकाने पर हुए मिसाइल हमले में पांच टैंकर विमान क्षतिग्रस्त बताए जा रहे हैं।
इस बीच Benjamin Netanyahu ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ कहा कि इजरायल अपने फैसले खुद लेने में सक्षम है और अमेरिका को इस युद्ध में घसीटने के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने Donald Trump का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका अपने हितों के अनुसार निर्णय लेता है और कोई बाहरी दबाव उस पर नहीं होता।
लगातार हो रहे हमलों और जवाबी कार्रवाई से यह साफ संकेत मिल रहा है कि हालात जल्द शांत होने वाले नहीं हैं। अगर तनाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो यह संघर्ष एक बड़े क्षेत्रीय या वैश्विक युद्ध में बदल सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और सुरक्षा पर पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, मध्य पूर्व की यह स्थिति अब सिर्फ एक क्षेत्रीय विवाद नहीं रह गई है, बल्कि यह वैश्विक स्थिरता के लिए एक गंभीर खतरा बनती जा रही है।